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महाराष्ट्र में फिर बढ़े कोरोना के मामले, पुणे में संक्रमण बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग सतर्क

महाराष्ट्र में कोरोना वायरस ने एक बार फिर अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। करीब तीन साल बाद राज्य में कोविड-19 के मामलों में दोबारा बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। विशेष रूप से पुणे शहर में पिछले कुछ दिनों के दौरान संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ने से स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा विशेषज्ञ सतर्क हो गए हैं। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान स्थिति को कोरोना की नई लहर नहीं माना जा सकता, लेकिन संक्रमण के बढ़ते मामलों पर लगातार नजर रखी जा रही है।

महाराष्ट्र स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2026 में अब तक राज्य में कोविड-19 के कुल 48 मामले दर्ज किए गए हैं। राहत की बात यह है कि इनमें से किसी भी मरीज की मृत्यु नहीं हुई है और अधिकांश संक्रमितों में बीमारी के लक्षण बेहद हल्के पाए गए हैं। जुलाई माह में अब तक सबसे अधिक 21 नए मरीज सामने आए हैं, जबकि जनवरी में 3, फरवरी में 1 और जून में 11 मामले दर्ज किए गए थे। जुलाई में अचानक बढ़े मामलों ने स्वास्थ्य विभाग को निगरानी बढ़ाने के लिए प्रेरित किया है।

पुणे के प्रमुख निजी अस्पतालों में भी कोविड मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी देखी जा रही है। जहांगीर अस्पताल के संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. पीयूष चौधरी ने बताया कि पिछले आठ से दस दिनों के भीतर उनके अस्पताल में ही सात से आठ कोविड संक्रमित मरीज सामने आए हैं। उनका कहना है कि यदि एक अस्पताल में इतने मामले मिल रहे हैं तो शहर में संक्रमितों की वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि अब तक किसी भी मरीज में गंभीर लक्षण नहीं पाए गए हैं और सभी की स्थिति सामान्य बनी हुई है।

विशेषज्ञों के अनुसार इस बार का संक्रमण पहले की तुलना में काफी हल्का दिखाई दे रहा है। मरीजों में मुख्य रूप से खांसी, जुकाम, गले में खराश, शरीर में दर्द और थकान जैसे लक्षण देखे जा रहे हैं। अधिकांश मरीज तीन से पांच दिनों के भीतर पूरी तरह स्वस्थ हो रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि वर्तमान संक्रमण का प्रभाव ओमिक्रॉन वेरिएंट से भी कम गंभीर प्रतीत हो रहा है।

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी सामने आया है कि ज्यादातर संक्रमित मरीज कोरोना की जांच कराने अस्पताल नहीं पहुंचे थे। कई लोगों की पहचान अन्य बीमारियों के इलाज, सर्जरी से पहले की जाने वाली नियमित जांच या डॉक्टरों द्वारा सुझाए गए परीक्षणों के दौरान हुई। इससे यह संभावना भी जताई जा रही है कि हल्के लक्षण वाले कई लोग जांच नहीं करा रहे हैं, जिसके कारण वास्तविक संक्रमितों की संख्या आधिकारिक आंकड़ों से अधिक हो सकती है।

सिम्बायोसिस और जुपिटर अस्पताल की विशेषज्ञ डॉ. सुजाता रेगे का कहना है कि पहले कम जांच होने के कारण कई मामले सामने नहीं आ पाते थे। अब अपर रेस्पिरेटरी पैनल टेस्ट का उपयोग बढ़ गया है, जिससे कोविड संक्रमण की पहचान आसानी से हो रही है। यही वजह है कि अब ऐसे मरीज भी रिकॉर्ड में आ रहे हैं, जिनमें लक्षण बेहद मामूली हैं।

जुपिटर अस्पताल की पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. श्रद्धा कुलकर्णी के अनुसार फिलहाल स्थिति चिंताजनक नहीं है, लेकिन आने वाले कुछ सप्ताह महत्वपूर्ण रहेंगे। उन्होंने कहा कि संक्रमण की गति और नए मामलों की संख्या पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। यदि मामलों में अचानक वृद्धि होती है तो स्वास्थ्य विभाग आवश्यक कदम उठा सकता है।

विशेषज्ञों ने आम नागरिकों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है। उनका कहना है कि यदि किसी व्यक्ति को सर्दी, खांसी, बुखार या गले में खराश जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे मास्क पहनना चाहिए और भीड़भाड़ वाले स्थानों से बचना चाहिए। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।

डॉक्टरों का मानना है कि बदलते मौसम, समय के साथ कमजोर होती प्रतिरक्षा क्षमता और वायरस के नए स्वरूपों के कारण कोविड संक्रमण भविष्य में भी समय-समय पर सामने आता रहेगा। अब कोरोना को कई विशेषज्ञ फ्लू जैसी मौसमी श्वसन संबंधी बीमारियों की श्रेणी में देख रहे हैं, जिसमें संक्रमण के मामले समय-समय पर बढ़ते और घटते रहते हैं।

फिलहाल महाराष्ट्र में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग लोगों से सावधानी बरतने और किसी भी लक्षण को नजरअंदाज न करने की अपील कर रहा है। कोरोना का खतरा भले पहले जितना गंभीर न हो, लेकिन सतर्कता और जिम्मेदारी ही संक्रमण को फैलने से रोकने का सबसे प्रभावी तरीका बनी हुई है।