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बीजेपी के पार्षद टिकट के लिए 19 बिंदुओं का आवेदन, टिकट नहीं मिला तो तीन प्रतिद्वंदियों के नाम भी बताने होंगे

जयपुर। निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी से पार्षद का टिकट चाहने वाले नेताओं के लिए इस बार आवेदन प्रक्रिया पहले से ज्यादा विस्तृत और पारदर्शी रखी गई है। टिकट के दावेदारों को 19 बिंदुओं में अपनी व्यक्तिगत, राजनीतिक और संगठनात्मक जानकारी पार्टी को देनी होगी। खास बात यह है कि आवेदन करने वाले नेता को अपने वार्ड से टिकट की दौड़ में शामिल खुद के तीन प्रतिद्वंदियों के नाम भी बताने होंगे, जिन्हें पार्टी टिकट के लिए योग्य मानकर विचार कर सकती है।

पार्टी का मानना है कि संगठन में सक्रिय कार्यकर्ता केवल खुद को ही टिकट का योग्य दावेदार न माने, बल्कि अपने वार्ड में दूसरे ऐसे कार्यकर्ताओं की पहचान भी करे जो संगठन के साथ जनता के बीच भी सक्रिय हैं। इसी सोच के तहत आवेदन पत्र में तीन अन्य संभावित उम्मीदवारों के नाम और उनकी वरीयता बताने का कॉलम जोड़ा गया है।

बीजेपी की प्रदेश मंत्री एकता अग्रवाल ने कहा कि पार्टी की खूबसूरती उसका कार्यकर्ता और संगठन है। आवेदन पत्र में एक कॉलम इसलिए रखा गया है कि टिकट मांगने वाला कार्यकर्ता अपने अलावा उन लोगों के नाम भी बताए, जिन्हें वह संगठन की सेवा और जनता के बीच काम करने के लिहाज से योग्य समझता है। पार्टी ने इसी सद्भाव के साथ संबंधित वार्ड के तीन प्रतिद्वंदियों के नाम मांगे हैं।

आपराधिक मामलों की पूरी जानकारी देनी होगी

इस बार पार्टी ने आपराधिक मामलों को लेकर भी आवेदन प्रक्रिया में महत्वपूर्ण बदलाव किया है। यदि किसी आवेदक के खिलाफ वर्तमान में कोई मुकदमा दर्ज है या पूर्व में कोई मामला दर्ज रहा है तो उसकी जानकारी आवेदन पत्र में देना अनिवार्य होगा।

अब तक पार्टी स्तर पर आपराधिक मामलों को लेकर मौखिक रूप से जानकारी ली जाती थी, लेकिन इस बार दावेदारों से पूरी जानकारी लिखित में मांगी गई है। आवेदक को एफआईआर नंबर, संबंधित पुलिस थाना, अपराध की धाराएं, कोर्ट का नाम और आरोप की तारीख जैसी जानकारी देनी होगी।

इससे पार्टी के पास टिकट के दावेदारों की पृष्ठभूमि की जानकारी आवेदन के स्तर पर ही उपलब्ध हो सकेगी। साथ ही किसी आपराधिक मामले की जानकारी छिपाने की स्थिति में पार्टी के स्तर पर उस पर अलग से विचार किया जा सकेगा।

जिस वार्ड से टिकट मांगा, वहां का वोटर होना जरूरी

पार्षद का टिकट चाहने वाले नेताओं को इस बार अपने वार्ड के स्थायी निवासी होने का प्रमाण भी देना होगा। आवेदन पत्र में यह जानकारी देनी होगी कि जिस वार्ड से टिकट मांगा जा रहा है, आवेदक उसी वार्ड का निवासी है या नहीं।

इसके सत्यापन के लिए पार्टी ने मतदाता पहचान पत्र अथवा मतदाता सूची का क्रमांक देना अनिवार्य किया है। इससे पार्टी यह जांच सकेगी कि टिकट मांगने वाला नेता वास्तव में संबंधित वार्ड का मतदाता है या नहीं।

दरअसल, पहले कई बार उम्मीदवार जिस वार्ड से टिकट मांगते थे, वहां का निवासी साबित करने के लिए आधार कार्ड में पता बदलवा लेते थे। इस बार पार्टी ने आधार कार्ड के बजाय मतदाता पहचान पत्र या मतदाता सूची के क्रमांक को प्राथमिकता दी है। इससे वार्ड में वास्तविक निवास और मतदाता सूची में दर्ज नाम का सत्यापन किया जा सकेगा।

विशेष परिस्थिति में दूसरे वार्ड से भी मिल सकता है टिकट

जयपुर नगर निगम के प्रभारी मंत्री जोगाराम पटेल के मुताबिक, सामान्य तौर पर पार्टी की नीति यही रहती है कि उम्मीदवार जिस वार्ड से टिकट मांग रहा है, वह उसी वार्ड का निवासी हो। हालांकि उन्होंने कहा कि विशेष परिस्थितियों में पार्टी किसी कार्यकर्ता को दूसरे वार्ड से भी चुनाव मैदान में उतार सकती है।

पटेल के अनुसार, यदि संगठन को लगता है कि किसी कार्यकर्ता का उपयोग किसी दूसरे क्षेत्र में ज्यादा बेहतर तरीके से हो सकता है तो पार्टी उसके नाम पर वहां से भी विचार कर सकती है। यानी वार्ड का मतदाता होना आवेदन के स्तर पर महत्वपूर्ण है, लेकिन पार्टी के पास विशेष परिस्थितियों में निर्णय लेने का अधिकार रहेगा।

पार्टी की सदस्यता से लेकर संगठन में जिम्मेदारी तक बतानी होगी

19 बिंदुओं वाले आवेदन पत्र में केवल व्यक्तिगत जानकारी ही नहीं, बल्कि आवेदक की संगठनात्मक पृष्ठभूमि भी मांगी गई है। टिकट के दावेदार को यह बताना होगा कि वह बीजेपी का प्राथमिक सदस्य कब बना। इसके साथ ही उसकी सक्रिय सदस्यता का क्रमांक भी आवेदन में दर्ज करना होगा।

आवेदक को पार्टी संगठन में वर्तमान और पूर्व में निभाई गई जिम्मेदारियों की जानकारी भी देनी होगी। इससे पार्टी यह देख सकेगी कि संबंधित नेता संगठन में कितने समय से सक्रिय है और उसने पहले किन-किन पदों पर जिम्मेदारी निभाई है।

पहले लड़े चुनावों का भी देना होगा ब्यौरा

यदि आवेदक ने पहले कभी कोई चुनाव लड़ा है तो इसकी पूरी जानकारी भी आवेदन पत्र में देनी होगी। यानी उसका चुनावी अनुभव, किस चुनाव में भाग लिया और संबंधित चुनाव से जुड़ी जरूरी जानकारी पार्टी के रिकॉर्ड में दर्ज होगी।

इस पूरी प्रक्रिया से पार्टी टिकट के दावेदारों की संगठनात्मक सक्रियता, वार्ड में उनकी स्थिति, चुनावी अनुभव और कानूनी पृष्ठभूमि का एक विस्तृत रिकॉर्ड तैयार कर सकेगी।

टिकट वितरण से पहले दावेदारों की मजबूत स्क्रीनिंग

बीजेपी के इस नए आवेदन प्रारूप को टिकट वितरण से पहले दावेदारों की स्क्रीनिंग की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। एक तरफ पार्टी वार्ड में उम्मीदवार की वास्तविक स्थिति और मतदाता पहचान की जांच करेगी, वहीं दूसरी तरफ आपराधिक मामलों की लिखित जानकारी लेकर दावेदार की कानूनी पृष्ठभूमि भी देखेगी।

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव यह है कि टिकट की मांग करने वाले नेता को अपने अलावा तीन अन्य संभावित दावेदारों के नाम भी सुझाने होंगे। इससे पार्टी को प्रत्येक वार्ड में उपलब्ध संभावित चेहरों का एक व्यापक विकल्प मिल सकेगा।

इस तरह निकाय चुनाव में टिकट वितरण के दौरान केवल व्यक्तिगत दावेदारी ही नहीं, बल्कि संगठन के प्रति कार्यकर्ता की सोच, वार्ड में उसकी स्वीकार्यता और अन्य संभावित उम्मीदवारों के बारे में उसकी राय को भी महत्व दिया जाएगा। बीजेपी की यह प्रक्रिया आने वाले निकाय चुनाव में टिकट चयन को अधिक व्यवस्थित और दस्तावेज आधारित बनाने की कोशिश के तौर पर देखी जा रही है।

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