उस समय जिला परिषद की कुल 25 सीटों में से भाजपा ने 13 पर जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस को 12 सीटें मिली थीं। सामान्य तौर पर इस संख्या बल के आधार पर भाजपा की दावेदारी मजबूत मानी जा रही थी, लेकिन जिला प्रमुख के चुनाव में क्रॉस वोटिंग ने पूरा सियासी गणित बदल दिया। भाजपा के बहुमत के बावजूद कांग्रेस प्रत्याशी उर्मिला जैन भाया की जीत ने प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी थी।
इस घटनाक्रम का दूसरा दिलचस्प पहलू अगले दिन सामने आया, जब उप जिला प्रमुख के चुनाव में भाजपा के छीतरलाल निर्वाचित हो गए। एक दिन पहले जिला प्रमुख का पद गंवाने और अगले दिन उप जिला प्रमुख का चुनाव जीतने के घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े किए थे। जिला प्रमुख के चुनाव में किसने क्रॉस वोटिंग की थी, इसका रहस्य आज तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।
वर्ष 2021 के जिला परिषद चुनाव में मत प्रतिशत के मामले में कांग्रेस भाजपा से आगे रही थी। कांग्रेस को कुल 48.52 प्रतिशत मत मिले थे, जबकि भाजपा को 47.65 प्रतिशत मत हासिल हुए थे। दोनों दलों के बीच मत प्रतिशत का अंतर कम था, लेकिन सीटों के परिणाम में भाजपा आगे निकल गई।
भाजपा ने जिला परिषद के 25 वार्डों में से 13 पर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस को 12 वार्डों में सफलता मिली। इस तरह सीटों के आधार पर भाजपा को स्पष्ट बढ़त हासिल हुई थी। इसके बावजूद जिला प्रमुख का चुनाव पार्टी के लिए अप्रत्याशित साबित हुआ।
जिला प्रमुख का पद अनारक्षित महिला के लिए निर्धारित था। ऐसे में दोनों दलों की नजर महिला उम्मीदवारों पर थी। कांग्रेस की उर्मिला जैन भाया ने जिला परिषद के वार्ड संख्या 24 से चुनाव जीता था। बाद में जिला प्रमुख के चुनाव में उन्हें सफलता मिली और वे भाजपा के बहुमत के बावजूद इस पद पर निर्वाचित हो गईं।
क्रॉस वोटिंग की चर्चा के बीच उस समय भाजपा के भीतर भी इस परिणाम को लेकर सवाल उठे थे। हालांकि, किस सदस्य ने किसे वोट दिया और भाजपा के खेमे में किस स्तर पर वोटों का समीकरण बदला, इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी।
जिला प्रमुख के चुनाव में हार भाजपा के लिए बड़ा राजनीतिक झटका थी। पार्टी के पास जिला परिषद में 13 सदस्य थे, जबकि कांग्रेस के 12 सदस्य थे। इसके बावजूद जिला प्रमुख की कुर्सी कांग्रेस के खाते में चली गई। इस परिणाम के बाद बारां का घटनाक्रम प्रदेश स्तर पर चर्चा का विषय बन गया था।
हालांकि, अगले ही दिन उप जिला प्रमुख के चुनाव में भाजपा ने वापसी की। भाजपा के छीतरलाल उप जिला प्रमुख निर्वाचित हुए। जिला प्रमुख और उप जिला प्रमुख के चुनाव में आए अलग-अलग परिणामों ने राजनीतिक समीकरणों को लेकर कई चर्चाओं को जन्म दिया।
इस घटनाक्रम की चर्चा इसलिए भी होती है, क्योंकि जिला परिषद में बहुमत रखने के बावजूद भाजपा जिला प्रमुख का पद हासिल नहीं कर सकी, जबकि उप जिला प्रमुख के चुनाव में पार्टी प्रत्याशी जीत गया। जिला प्रमुख के चुनाव में क्रॉस वोटिंग किसने की थी, इसका खुलासा नहीं होने से यह मामला आज भी जिले की राजनीति के चर्चित प्रसंगों में शामिल है।
हाल के निकाय चुनावों में भी कुछ स्थानों पर अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के चुनाव में अलग-अलग दलों के प्रत्याशियों की जीत देखने को मिली। छबड़ा नगर पालिका में अध्यक्ष पद भाजपा और उपाध्यक्ष पद कांग्रेस के खाते में जाने का घटनाक्रम भी इसी तरह की राजनीतिक चर्चाओं का विषय बना।
वर्ष 2021 के चुनाव में बारां जिला परिषद की तस्वीर में महिलाओं की भागीदारी भी उल्लेखनीय रही थी। जिला परिषद के 25 निर्वाचित सदस्यों में 14 महिलाएं और 11 पुरुष शामिल थे। इनमें भाजपा की छह महिला उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की थी, जबकि कांग्रेस की आठ महिला उम्मीदवार निर्वाचित हुई थीं।
जिला प्रमुख का पद अनारक्षित महिला के लिए तय होने के कारण महिला उम्मीदवारों की भूमिका महत्वपूर्ण रही। वार्ड संख्या 24 से निर्वाचित उर्मिला जैन भाया ने जिला प्रमुख का चुनाव जीतकर कांग्रेस को बड़ी राजनीतिक सफलता दिलाई थी।
इस चुनाव ने यह भी दिखाया कि पंचायत और जिला परिषद के चुनाव में केवल सामान्य सीटों की संख्या ही अंतिम परिणाम तय नहीं करती। जिला प्रमुख और उप जिला प्रमुख जैसे पदों के लिए होने वाले चुनाव में सदस्यों का समर्थन निर्णायक भूमिका निभाता है। यही वजह रही कि जिला परिषद में एक सीट की बढ़त के बावजूद भाजपा जिला प्रमुख का चुनाव हार गई।
बारां जिले की आठ पंचायत समितियों में भी वर्ष 2021 में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला हुआ था। दोनों दलों ने चार-चार पंचायत समितियों में बोर्ड बनाए थे। इस तरह पंचायत समिति स्तर पर मुकाबला बराबरी का रहा।
मत प्रतिशत के लिहाज से बारां, अंता, छीपाबड़ौद और छबड़ा में भाजपा कांग्रेस से आगे रही थी। वहीं, मांगरोल, अटरू, किशनगंज और शाहाबाद में कांग्रेस ने भाजपा के मुकाबले अधिक मत हासिल किए थे।
शाहाबाद पंचायत समिति में कांग्रेस को 56.37 प्रतिशत मत मिले थे। यह आठों पंचायत समितियों में दोनों प्रमुख दलों के बीच दर्ज सर्वाधिक मत प्रतिशत था। दूसरी ओर, छीपाबड़ौद में भाजपा को 42.64 प्रतिशत मत मिले, जबकि कांग्रेस को 37.83 प्रतिशत मत हासिल हुए थे।
इन परिणामों से साफ था कि जिले में दोनों प्रमुख दलों के बीच मुकाबला क्षेत्रवार अलग-अलग रहा। कहीं भाजपा ने बढ़त बनाई तो कहीं कांग्रेस ने मजबूत प्रदर्शन किया। पंचायत समितियों में बराबरी और जिला परिषद में भाजपा की एक सीट की बढ़त के बावजूद जिला प्रमुख का चुनाव कांग्रेस के पक्ष में जाना उस समय के चुनावी परिणामों का सबसे चर्चित पहलू बना।
अब करीब छह साल बाद पंचायतीराज चुनावों की नई बिसात बिछने जा रही है। ऐसे में बारां जिले में भाजपा और कांग्रेस के सामने एक बार फिर पंचायत समिति और जिला परिषद में अपना प्रभाव बढ़ाने की चुनौती होगी।
वर्ष 2021 के चुनाव परिणाम दोनों दलों के लिए अहम राजनीतिक संदर्भ बने हुए हैं। उस समय पंचायत समितियों में बराबरी का मुकाबला रहा, जिला परिषद में भाजपा को एक सीट की बढ़त मिली, लेकिन जिला प्रमुख का पद कांग्रेस के खाते में चला गया। अगले दिन उप जिला प्रमुख के चुनाव में भाजपा की जीत ने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया था।
आगामी चुनाव में दोनों दलों की रणनीति, उम्मीदवारों का चयन और स्थानीय स्तर पर सदस्यों के बीच तालमेल महत्वपूर्ण होगा। हालांकि, वर्ष 2021 की तरह इस बार भी जिला परिषद में सीटों का गणित ही अंतिम पदाधिकारी का चुनाव तय करेगा या राजनीतिक समीकरण कोई नया मोड़ लेंगे, यह चुनाव परिणाम और उसके बाद होने वाले पदों के चुनाव से ही स्पष्ट होगा।
फिलहाल बारां की राजनीति में पुराने चुनाव का यह घटनाक्रम एक बार फिर चर्चा में है। बहुमत के बावजूद जिला प्रमुख का पद गंवाने और अगले दिन उप जिला प्रमुख का चुनाव जीतने की कहानी आगामी पंचायतीराज चुनावों से पहले जिले के सियासी इतिहास का महत्वपूर्ण उदाहरण बनी हुई है।