जयपुर। पुलिस और आमजन के बीच विश्वास मजबूत करने तथा पुलिसिंग को अधिक संवेदनशील, जनोन्मुखी एवं प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आईआईएचएमआर विश्वविद्यालय, जयपुर में आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शनिवार को समापन हुआ।
उदय पारीक एचआरडी रिसर्च फाउंडेशन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में पुलिसिंग में सकारात्मक व्यवहार, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, सहानुभूति, आत्म-जागरूकता, तनाव प्रबंधन और प्रभावी संवाद कौशल पर विशेष जोर दिया गया।
समापन समारोह में मुख्य अतिथि अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक, सामुदायिक पुलिसिंग एवं जन शिकायत, लता मनोज कुमार ने सकारात्मक व्यवहार को प्रभावी पुलिसिंग का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्यशैली में संवेदनशीलता, धैर्य और सहानुभूति का विशेष महत्व है। आमजन की समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुनना, उनकी परिस्थितियों को समझना और सम्मानजनक व्यवहार के साथ संवाद करना पुलिस एवं नागरिकों के बीच विश्वास को मजबूत बनाता है। पुलिसकर्मियों का व्यवहार न केवल नागरिकों के अनुभव को प्रभावित करता है, बल्कि पुलिस की छवि और कार्यप्रणाली के प्रति उनके भरोसे को भी निर्धारित करता है।
प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि प्रभावी पुलिसिंग केवल कानून लागू करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके लिए आत्म-जागरूकता, भावनात्मक बुद्धिमत्ता, तनाव प्रबंधन और कठिन परिस्थितियों में संतुलित व्यवहार भी आवश्यक हैं। संवादात्मक गतिविधियों, भूमिका-अभिनय, समूह चर्चाओं एवं व्यावहारिक अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को नागरिकों की बात ध्यानपूर्वक सुनने, प्रभावी संवाद स्थापित करने तथा चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में संयम बनाए रखने के तरीके सिखाए गए।
संभागियों ने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य पुलिस अधिकारियों में ऐसी कार्यशैली विकसित करना रहा, जिससे आमजन पुलिस के साथ सहजता से संवाद कर सकें और पुलिस-नागरिक संबंध अधिक मजबूत बनें।