एसीबी अधिकारियों के अनुसार, परिवादी की फर्म बिजली लाइन बिछाने से जुड़े कार्य में फाउंडेशन और अर्थिंग का काम कर रही थी। इस काम की निगरानी और प्रक्रिया से जुड़े मामलों में पावर ग्रिड के डीजीएम देवेश कुमार सिंह की भूमिका थी। आरोप है कि डीजीएम ने फर्म के काम को सुचारू रूप से चलने देने और किसी तरह की परेशानी या बाधा उत्पन्न नहीं करने के बदले एक लाख रुपए की रिश्वत की मांग की।
रिश्वत की मांग से परेशान होकर परिवादी ने इसकी शिकायत भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो से की। शिकायत मिलने के बाद एसीबी ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी प्रारंभिक जांच शुरू की। शिकायत की पुष्टि के लिए एसीबी टीम ने गोपनीय सत्यापन करवाया, जिसमें रिश्वत मांगने की बात सही पाई गई।
गोपनीय सत्यापन के दौरान आरोपी अधिकारी और परिवादी के बीच रिश्वत की राशि को लेकर बातचीत हुई। इसके बाद एक लाख रुपए की मांग के बदले 90 हजार रुपए में सौदा तय हुआ। एसीबी ने इसके बाद आरोपी को पकड़ने के लिए पूरी योजना तैयार की।
एसीबी मुख्यालय के निर्देश पर बीकानेर स्पेशल यूनिट चौकी की टीम ने रिश्वत लेते हुए आरोपी अधिकारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया। कार्रवाई को पूरी गोपनीयता के साथ अंजाम दिया गया, ताकि आरोपी को किसी तरह का संदेह न हो।
यह कार्रवाई उप महानिरीक्षक नारायण टोगस के सुपरविजन और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशीष कुमार के निर्देशन में की गई। पुलिस निरीक्षक इन्द्र कुमार के नेतृत्व में एसीबी टीम ने निर्धारित योजना के अनुसार कार्रवाई करते हुए डीजीएम देवेश कुमार सिंह को 90 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया।
एसीबी टीम ने रिश्वत की राशि बरामद कर आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर लिया है। गिरफ्तारी के बाद आरोपी से पूछताछ की जा रही है और मामले से जुड़े अन्य तथ्यों की जांच भी जारी है।
एसीबी की अतिरिक्त महानिदेशक स्मिता श्रीवास्तव ने बताया कि आरोपी अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है। महानिरीक्षक एस. परिमला के सुपरविजन में आरोपी से पूछताछ की जा रही है।
एसीबी टीम अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या आरोपी अधिकारी पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है या नहीं। इसके अलावा आरोपी के अन्य ठिकानों, संभावित संपत्तियों और मामले से जुड़े लोगों की भी जांच की जा रही है।
एसीबी अधिकारियों का कहना है कि भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा। रिश्वत मांगने वालों के खिलाफ लगातार अभियान चलाकर कार्रवाई की जा रही है।
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई सरकारी अधिकारी या कर्मचारी किसी काम के बदले रिश्वत की मांग करता है, तो इसकी सूचना तुरंत एसीबी को दें। ब्यूरो ने शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1064 और व्हाट्सएप हेल्पलाइन नंबर 9413502834 जारी किया है।
एसीबी के अनुसार, ये हेल्पलाइन सेवाएं 24 घंटे उपलब्ध हैं। शिकायतकर्ता की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। ब्यूरो ने आम लोगों को भरोसा दिलाया है कि रिश्वत मांगने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी तथा शिकायतकर्ताओं को उनके वैध कार्यों में आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
बीकानेर में हुई यह कार्रवाई भ्रष्टाचार के खिलाफ एसीबी के अभियान का एक बड़ा उदाहरण मानी जा रही है। सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों में पारदर्शिता बनाए रखने और रिश्वतखोरी पर रोक लगाने के लिए ऐसी कार्रवाइयों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।