नई दिल्ली। जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए चर्चित आतंकी हमले की जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने सोमवार को अदालत में सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल कर कई अहम खुलासे किए हैं। एजेंसी ने इस बार पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के सरगना हाफिज सईद को हमले का प्रमुख साजिशकर्ता बताया है। NIA के अनुसार, 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम की बैसरन घाटी में हुए आतंकी हमले की पूरी योजना हाफिज सईद की देखरेख में तैयार की गई थी। एजेंसी ने उस पर भारत के खिलाफ युद्ध छेड़ने और आतंकवादी गतिविधियों को संचालित करने का आरोप लगाया है।
गौरतलब है कि 22 अप्रैल 2025 को बैसरन घाटी में आतंकियों ने पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। हमलावरों ने कथित तौर पर पर्यटकों से उनका धर्म पूछने के बाद गोली मारी थी। इस बर्बर हमले में 26 पर्यटकों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू की थी।
हमले के जवाब में भारत ने 6 और 7 मई 2025 की रात ऑपरेशन सिंदूर चलाया था। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में आतंकियों के नौ ठिकानों को निशाना बनाया गया। भारत का दावा है कि इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादी मारे गए थे।
NIA ने इस मामले में पहली चार्जशीट 15 दिसंबर 2025 को दाखिल की थी। उस समय पाकिस्तान के आतंकी हैंडलर साजिद जट सहित छह आतंकियों को आरोपी बनाया गया था। हालांकि पहली चार्जशीट में हाफिज सईद का नाम शामिल नहीं था। अब सप्लीमेंट्री चार्जशीट में नए साक्ष्यों के आधार पर एजेंसी ने हाफिज सईद को भी मुख्य आरोपी बनाया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, पहलगाम हमले में शामिल तीनों आतंकवादी बाद में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं, जबकि उनका मुख्य हैंडलर सैफुल्लाह जट्ट उर्फ 'लंगड़ा' अभी भी फरार है। उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित किया गया है।
NIA की जांच में सामने आया है कि लश्कर का आतंकी सैफुल्लाह जट्ट उर्फ लंगड़ा इस हमले का मुख्य ऑपरेशनल हैंडलर था। वह पाकिस्तान से आतंकियों को लगातार रियल टाइम निर्देश दे रहा था। जांच में पता चला कि उसी ने बैसरन घाटी की लोकेशन आतंकियों तक पहुंचाई और हमले के दौरान भी उनसे लगातार संपर्क में रहा।
एजेंसी के मुताबिक, पाकिस्तान के लाहौर के कसूर इलाके में रहने वाला आतंकी साजिद जट भी पूरी साजिश में सक्रिय भूमिका निभा रहा था। दोनों हैंडलरों ने मिलकर हमले की रणनीति तैयार की और आतंकियों को हर चरण में मार्गदर्शन दिया।
जांच के दौरान NIA ने दो स्थानीय टूरिस्ट गाइड—परवेज अहमद जोठार और बशीर अहमद जोठार—को भी गिरफ्तार किया है। एजेंसी का आरोप है कि दोनों ने हमले से पहले आतंकियों को बैसरन घाटी में देखा था, लेकिन इसकी सूचना सुरक्षा एजेंसियों को नहीं दी। यदि समय रहते जानकारी दी जाती तो संभवतः इस हमले को रोका जा सकता था।
चार्जशीट के अनुसार, हमले से एक दिन पहले तीनों आतंकी गाइड परवेज की झोपड़ी में पहुंचे थे। वहां उन्होंने खाना खाया और जाते समय रोटी-सब्जी भी अपने साथ ले गए। अगले दिन हमले से पहले उन्होंने बैसरन घाटी में एक पेड़ के नीचे बैठकर वही खाना खाया था। इसके बाद उन्होंने पर्यटकों पर हमला किया और फायरिंग के दौरान धार्मिक नारे भी लगाए।
NIA की जांच में यह भी सामने आया कि आतंकियों ने हमले की रिकॉर्डिंग के लिए एक एक्शन कैमरे का इस्तेमाल किया था। यह कैमरा अमेरिका में निर्मित था, लेकिन चीन के रास्ते पाकिस्तान पहुंचा और वहां से आतंकियों तक पहुंचाया गया। आमतौर पर इस प्रकार के कैमरे ट्रैकिंग, बाइकिंग, डाइविंग और यात्रा के दौरान वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए उपयोग किए जाते हैं।
जांच एजेंसी ने बताया कि मारे गए आतंकियों के पास से दो मोबाइल फोन बरामद किए गए थे—एक ऑरेंज रंग का Redmi 9T और दूसरा ब्लैक रंग का Redmi Note 12। जांच में पता चला कि ये दोनों मोबाइल कराची की सप्लाई चेन के जरिए पाकिस्तान पहुंचे थे और वहीं से आतंकियों को उपलब्ध कराए गए। इन मोबाइलों के नेविगेशन ऐप में बैसरन घाटी की लोकेशन, स्क्रीनशॉट और अन्य डिजिटल सबूत मिले, जिन्होंने पूरे षड्यंत्र की पुष्टि करने में अहम भूमिका निभाई।
NIA का कहना है कि सप्लीमेंट्री चार्जशीट में शामिल नए साक्ष्य हमले के अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क, पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों की भूमिका और उनके ऑपरेशनल तंत्र को और स्पष्ट करते हैं। एजेंसी का मानना है कि इस मामले में आगे भी जांच जारी रहेगी और यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो अतिरिक्त आरोपियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।