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साध्वी प्रेम बाईसा मौत मामला: SIT पहुंची प्रेक्षा अस्पताल; डॉक्टर बोले- "जब उन्हें लाया गया, शरीर में कोई हलचल नहीं थी"

जोधपुर: राजस्थान की प्रसिद्ध कथावाचक साध्वी प्रेम बाईसा की संदिग्ध मौत की गुत्थी सुलझाने के लिए गठित एसआईटी (SIT) की जांच अब अस्पतालों और मेडिकल रिकॉर्ड्स पर केंद्रित हो गई है। मंगलवार को एसआईटी इंचार्ज एसीपी वेस्ट छवि शर्मा अपनी टीम के साथ जोधपुर के प्रेक्षा अस्पताल पहुंचीं। यह वही अस्पताल है जहां तबीयत बिगड़ने पर साध्वी को सबसे पहले लाया गया था और डॉक्टरों ने उन्हें 'ब्रॉट डेड' (मृत अवस्था में लाया गया) घोषित किया था।

 

डॉक्टर का बयान: "इलाज नहीं लिखा, केवल परामर्श के लिए आती थीं"

अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण कुमार जैन से एसआईटी ने लंबी पूछताछ की। डॉक्टर ने साध्वी की मेडिकल हिस्ट्री और मौत के समय की स्थितियों को लेकर कई अहम जानकारियां दीं:

  • पुरानी शिकायत: डॉक्टर जैन ने बताया कि साध्वी पिछले कुछ महीनों में कई बार जुकाम, खांसी और गले में तकलीफ की शिकायत लेकर आई थीं। हालांकि, उन्होंने इस बात की पुष्टि नहीं की कि साध्वी को अस्थमा था या नहीं।

  • मौत के समय की स्थिति: डॉक्टर के अनुसार, "जब साध्वी को अस्पताल लाया गया, तो वे पूरी तरह निढाल (कॉलैप्स) थीं। शरीर में कोई हलचल नहीं थी और वे बेहोश थीं।"

  • इंजेक्शन का रहस्य: जांच में सामने आया कि अस्पताल लाने से पहले उन्हें किसी स्थानीय कंपाउंडर से इंजेक्शन लगवाया गया था। डॉक्टर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने हाल के दिनों में उन्हें कोई दवा या इंजेक्शन नहीं लिखा था।

 

SIT की कार्रवाई: 10 लोगों से पूछताछ और सैंपल्स का इंतजार

एसीपी छवि शर्मा ने बताया कि पुलिस हर उस कड़ी को जोड़ने की कोशिश कर रही है जो साध्वी की मौत से जुड़ी हो सकती है।

  • पूछताछ: अब तक करीब 10 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। इनमें साध्वी के पिता वीरमनाथ, मामा गंगाराम, आश्रम का केयरटेकर सुरेश और अस्पताल का स्टाफ शामिल है।

  • फॉरेंसिक साक्ष्य: मेडिकल बोर्ड द्वारा लिए गए विसरा और अन्य सैंपल्स को जांच के लिए विभिन्न लैब में भेजा गया है।

  • टेक्निकल एविडेंस: पुलिस साध्वी के मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड्स और सोशल मीडिया गतिविधियों (विशेषकर मौत के बाद वायरल हुए पोस्ट) का तकनीकी विश्लेषण कर रही है।