जानकारी के अनुसार, बारां निवासी रोशन बैरवा को परिजन शुक्रवार रात करीब 8 बजे न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल लेकर पहुंचे थे। अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि महिला हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की मरीज थी। उसे एनीमिया था और उसका वजन भी करीब 39 से 40 किलो था। महिला की यह तीसरी प्रेग्नेंसी थी।
अस्पताल में शुक्रवार रात करीब 12 बजे सिजेरियन डिलीवरी कराई गई। डिलीवरी के बाद महिला को ब्लीडिंग होने लगी। रक्तस्राव को नियंत्रित करने के लिए उसे एक यूनिट ब्लड चढ़ाया गया, लेकिन ब्लीडिंग बंद नहीं हुई।
अस्पताल अधीक्षक के मुताबिक, रक्तस्राव नहीं रुकने पर महिला को दोबारा ऑपरेशन थिएटर (ओटी) में ले जाया गया। डॉक्टरों ने उसे बचाने के प्रयास किए, लेकिन ब्लीडिंग लगातार जारी रही। शनिवार सुबह करीब 11:30 बजे महिला की मौत हो गई।
मृतका के पति महेंद्र ने बताया कि शनिवार सुबह करीब 7 बजे से रोशन की सांस फूलने लगी थी और तबीयत बिगड़ने लगी थी। इसके बाद उसे आईसीयू में शिफ्ट किया गया। पति के अनुसार, इस दौरान रोशन का पेट भी फूल रहा था।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, परिजनों ने लिखित में दिया कि वे मामले में कोई कार्रवाई नहीं चाहते। साथ ही उन्होंने पोस्टमार्टम कराने से भी इनकार कर दिया। इसके बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा का कहना है कि डॉक्टरों की टीम ने महिला की जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया, लेकिन अधिक रक्तस्राव के कारण उसकी मौत हो गई।
रोशन बैरवा से पहले शुक्रवार को रेशमा (40) की मौत का मामला सामने आया था। बताया गया कि डिलीवरी के बाद उनकी किडनी फेल हो गई थी। लगातार दो प्रसूताओं की मौत के बाद अस्पताल में प्रसव के दौरान सामने आने वाली जटिलताओं को लेकर चिंता बढ़ गई है।
हालांकि, दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग बताई गई हैं। रोशन बैरवा की मौत की वजह अस्पताल प्रशासन ने अत्यधिक रक्तस्राव बताई है। मामले में किसी भी तरह की चिकित्सकीय लापरवाही की आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं हुई है।