कोटा। राजस्थान के कोटा से स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक भावुक और गंभीर मामला सामने आया है। किडनी की गंभीर बीमारी से पीड़ित बच्चों की पांच महिलाओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर मदद की अपील की है। उनका कहना है कि उनके बच्चों की जान बचाने के लिए समय पर किडनी ट्रांसप्लांट आवश्यक है, लेकिन सरकारी अस्पतालों में ट्रांसप्लांट सुविधा शुरू नहीं होने और लंबी प्रतीक्षा के कारण इलाज प्रभावित हो रहा है। पत्र में उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए लिखा है कि यदि उनके बच्चों को समय पर जीवनरक्षक इलाज उपलब्ध नहीं कराया जा सकता, तो उन्हें "किडनी दी जाए या फिर मौत" दे दी जाए।
महिलाओं का आरोप है कि कोटा मेडिकल कॉलेज से संबद्ध एमबीएस अस्पताल में पिछले करीब डेढ़ वर्ष से किडनी प्रत्यारोपण (किडनी ट्रांसप्लांट) की सुविधा प्रभावी रूप से शुरू नहीं हो सकी है। इसके कारण गंभीर किडनी रोग से जूझ रहे बच्चों और उनके परिवारों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि जिन बच्चों को नियमित डायलिसिस की आवश्यकता है, उन्हें सप्ताह में कई बार अस्पताल लाना पड़ता है, जिससे परिवारों पर आर्थिक और मानसिक दोनों तरह का भारी दबाव पड़ रहा है।
परिजनों के अनुसार, इलाज की मौजूदा व्यवस्था उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हो रही है। कई परिवार सीमित आय के बावजूद बच्चों का इलाज कराने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे हैं। डायलिसिस के लिए बार-बार अस्पताल के चक्कर लगाने, दवाइयों और अन्य चिकित्सा खर्चों ने उनकी आर्थिक स्थिति को कमजोर कर दिया है। कुछ परिवारों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें इलाज के लिए दूसरे शहरों का रुख करना पड़ता है, जिससे समय और खर्च दोनों बढ़ जाते हैं।
राष्ट्रपति को भेजे गए पत्र में महिलाओं ने प्रदेश में किडनी रोग से पीड़ित बच्चों की स्थिति पर चिंता जताते हुए दावा किया है कि हाल के समय में कई जिलों में ऐसे मरीजों की मौत के मामले सामने आए हैं। उनका कहना है कि यदि समय पर उपचार और किडनी ट्रांसप्लांट की सुविधा उपलब्ध होती, तो कई मरीजों की जान बचाई जा सकती थी। उन्होंने सरकार से मांग की है कि किडनी रोग से पीड़ित बच्चों के लिए विशेष चिकित्सा व्यवस्था की जाए और कोटा सहित अन्य सरकारी अस्पतालों में ट्रांसप्लांट सेवाएं जल्द शुरू कराई जाएं।
परिजनों का कहना है कि बच्चों की गंभीर बीमारी के कारण पूरा परिवार लगातार मानसिक तनाव में जी रहा है। इलाज की अनिश्चितता और बढ़ते खर्च ने उनकी परेशानियां और बढ़ा दी हैं। उनका कहना है कि हर दिन उनके लिए चिंता और असमंजस से भरा होता है, क्योंकि उन्हें अपने बच्चों के भविष्य की चिंता सताती रहती है। उन्होंने सरकार से मानवीय आधार पर शीघ्र हस्तक्षेप करने और गंभीर मरीजों को प्राथमिकता के आधार पर उपचार उपलब्ध कराने की मांग की है।
पत्र में महिलाओं ने यह भी कहा है कि सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना समय की जरूरत है। उनका मानना है कि यदि स्थानीय स्तर पर किडनी ट्रांसप्लांट जैसी सुविधाएं शुरू हो जाएं तो मरीजों को दूसरे शहरों में भटकना नहीं पड़ेगा और समय रहते उनका उपचार संभव हो सकेगा। उन्होंने संबंधित विभाग से विशेषज्ञ चिकित्सकों, आवश्यक उपकरणों और ट्रांसप्लांट से जुड़ी सभी व्यवस्थाओं को जल्द पूरा करने की अपील की है।
फिलहाल इस मामले में संबंधित स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि परिजनों को उम्मीद है कि राष्ट्रपति को भेजे गए उनके पत्र पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और राज्य सरकार तथा स्वास्थ्य विभाग इस दिशा में आवश्यक कदम उठाएंगे।
यह मामला एक बार फिर गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों, विशेषकर बच्चों के लिए सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और समय पर उपचार की आवश्यकता को लेकर सवाल खड़े करता है। प्रभावित परिवारों का कहना है कि उनका उद्देश्य केवल अपने बच्चों के लिए जीवनरक्षक इलाज सुनिश्चित कराना है। अब उनकी निगाहें सरकार और संबंधित अधिकारियों की कार्रवाई पर टिकी हैं, ताकि समय पर उपचार मिल सके और बच्चों का जीवन बचाया जा सके।