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पेपर लीक पर पीएम मोदी का बड़ा ऐलान: दोषियों के लिए बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट, राहुल गांधी ने साधा निशाना

नई दिल्ली। देशभर में पेपर लीक मामलों को लेकर बढ़ते विवाद, छात्रों के आंदोलनों और विपक्ष के लगातार हमलों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बड़ा ऐलान किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि पेपर लीक जैसे गंभीर अपराधों के मामलों की सुनवाई के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे, ताकि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वाले दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि छात्रों के भविष्य को नुकसान पहुंचाने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

प्रधानमंत्री का यह ऐलान ऐसे समय आया है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) पिछले 34 दिनों से जंतर-मंतर पर आंदोलन कर रही है और NEET समेत विभिन्न परीक्षा घोटालों को लेकर विपक्ष भी लगातार सरकार पर हमलावर है। दूसरी ओर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक 26 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं और फिलहाल गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं, जहां उनका उपचार चल रहा है।

पेपर लीक मामलों के लिए पहली बार विशेष अदालतें

अब तक देश में पेपर लीक और परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होती रही है। कानूनी प्रक्रिया लंबी होने के कारण कई मामलों में फैसला आने में वर्षों लग जाते हैं। ऐसे में सरकार ने पहली बार इन मामलों के लिए विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाने का निर्णय लिया है।

सरकार का मानना है कि त्वरित सुनवाई से न केवल दोषियों को जल्द सजा मिलेगी बल्कि भविष्य में ऐसे अपराधों पर भी प्रभावी रोक लगाई जा सकेगी। केंद्र सरकार का कहना है कि लाखों छात्रों और उनके परिवारों का भरोसा बनाए रखने के लिए न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना आवश्यक है।

क्या हैं फास्ट ट्रैक कोर्ट?

फास्ट ट्रैक कोर्ट भारत की न्यायिक व्यवस्था का एक विशेष हिस्सा हैं, जिनकी स्थापना लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे के उद्देश्य से की गई थी। इन अदालतों की शुरुआत वर्ष 2000 में 11वें वित्त आयोग की सिफारिश पर हुई थी। आयोग ने देशभर में 1,734 फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने के लिए विशेष अनुदान की अनुशंसा की थी।

इन अदालतों का मुख्य उद्देश्य ऐसे मामलों की सुनवाई को प्राथमिकता देना है, जिनमें त्वरित न्याय की आवश्यकता होती है। महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराध, बलात्कार और पॉक्सो मामलों में इन अदालतों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

बेहतर रहा है फास्ट ट्रैक कोर्ट का रिकॉर्ड

केंद्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2019 से 2025 के बीच रेप और पॉक्सो मामलों की सुनवाई के लिए गठित फास्ट ट्रैक अदालतों ने 3.06 लाख से अधिक मामलों का निपटारा किया है। इन अदालतों में मामलों के निस्तारण की दर 96.28 प्रतिशत रही है, जिसे काफी प्रभावी माना जाता है।

हालांकि नए मामलों के लगातार दर्ज होने के कारण लंबित मामलों की संख्या भी बढ़ी है। वर्ष 2025 के अंत तक करीब 2.45 लाख मामले लंबित थे, जबकि 2024 के अंत में यह संख्या 2.04 लाख थी। इसके बावजूद सरकार का मानना है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट ने न्याय प्रक्रिया को गति देने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

राहुल गांधी का पलटवार

प्रधानमंत्री के ऐलान के कुछ ही समय बाद लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। राहुल गांधी ने कहा कि युवाओं के भविष्य को सबसे अधिक नुकसान वर्तमान सरकार ने ही पहुंचाया है।

उन्होंने कहा, “आपने ही शिक्षा व्यवस्था को कमजोर होने दिया और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को संरक्षण दिया। अगर सरकार गंभीर होती तो इतने बड़े पैमाने पर पेपर लीक की घटनाएं सामने नहीं आतीं।”

राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही की कमी है और सरकार अब दबाव बढ़ने के बाद कार्रवाई का दिखावा कर रही है।

छात्रों पर कार्रवाई का मुद्दा भी गरमाया

राहुल गांधी ने बुधवार को दिल्ली स्थित इंदिरा भवन में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई का मुद्दा भी प्रमुखता से उठाया। करीब 40 मिनट तक चली प्रेस वार्ता में उन्होंने संसद चलो मार्च के दौरान हुई घटनाओं के वीडियो दिखाए और आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर अत्यधिक बल प्रयोग किया गया।

उन्होंने कहा कि NEET पेपर लीक विवाद से देश के लगभग 7.5 करोड़ छात्र और उनके परिवार प्रभावित हुए हैं, लेकिन अब तक किसी बड़े दोषी को सजा नहीं मिली है। उन्होंने इसे युवाओं के भविष्य से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बताया।

राहुल गांधी की तीन प्रमुख मांगें

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी ने केंद्र सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं—

  1. केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दें।

  2. छात्रों पर कथित बल प्रयोग करने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।

  3. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी छात्रों से सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।

राहुल गांधी ने कहा कि सरकार को छात्रों की बात सुननी चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान करना चाहिए, न कि उनकी आवाज दबानी चाहिए।

CJP आंदोलन और बढ़ता दबाव

इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी का आंदोलन लगातार जारी है। संगठन का दावा है कि देशभर से हजारों छात्र और युवा आंदोलन के समर्थन में जुड़ रहे हैं। जंतर-मंतर पर चल रहे धरने में छात्रों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि भी पहुंच रहे हैं।

आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में पेपर लीक मामलों में सख्त कार्रवाई, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना शामिल है।

राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बना मुद्दा

पेपर लीक का मुद्दा अब केवल परीक्षा प्रणाली तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह राष्ट्रीय राजनीति का प्रमुख विषय बन गया है। एक ओर सरकार दोषियों को सजा दिलाने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था लागू करने जा रही है, वहीं विपक्ष शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और जवाबदेही की मांग कर रहा है।

आने वाले दिनों में संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे पर बहस और संघर्ष जारी रहने की संभावना है। वहीं लाखों छात्र और अभिभावक इस उम्मीद में हैं कि सरकार और न्याय व्यवस्था मिलकर ऐसा तंत्र विकसित करेगी, जिससे भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर पूरी तरह अंकुश लगाया जा सके।