यह मामला उस विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें विपक्षी दल चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कई जगह धक्का-मुक्की और झड़प की स्थिति बनी थी।
इसी दौरान पुलिसकर्मियों के साथ कथित हाथापाई की शिकायत सामने आई। पुलिस अब इसी मामले में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत प्रदर्शन में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
दिल्ली पुलिस प्रदर्शन के दौरान बनाए गए वीडियो और अन्य फुटेज की जांच कर रही है। अलग-अलग मोबाइल फोन से रिकॉर्ड किए गए वीडियो के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि मौके पर वास्तव में क्या हुआ था और किन लोगों की पुलिसकर्मियों के साथ कथित तौर पर हाथापाई हुई।
पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान महिला पुलिसकर्मियों के साथ भी धक्का-मुक्की के वीडियो सामने आए हैं। फुटेज की जांच के आधार पर उन लोगों की पहचान की जा रही है, जिन पर पुलिस की ड्यूटी में बाधा डालने या पुलिसकर्मियों के साथ हाथापाई करने का आरोप है।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा के खिलाफ यह पहली पुलिस कार्रवाई नहीं है। 7 अक्टूबर को भी दोनों नेताओं समेत विपक्ष के कुछ नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज की गई थी।
वह मामला दिल्ली के आकाशवाणी भवन परिसर में बिना अनुमति प्रवेश करने से जुड़ा था। FIR में कुछ अन्य सांसदों और समर्थकों के नाम भी शामिल किए गए थे।
विपक्षी दल चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची में बदलाव को लेकर लगातार सवाल उठा रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर दिल्ली समेत अलग-अलग जगहों पर विरोध प्रदर्शन किए जा रहे हैं।
विपक्ष का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े सवालों पर चुनाव आयोग को जवाब देना चाहिए। वहीं, दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बिगाड़ने, पुलिसकर्मियों की ड्यूटी में रुकावट डालने और अन्य शिकायतों पर नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।
नई FIR में लगाए गए आरोपों की फिलहाल जांच चल रही है। पुलिस प्रदर्शन के वीडियो, मोबाइल फुटेज और अन्य उपलब्ध सबूतों को खंगाल रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या हुआ और किसकी क्या भूमिका थी।
नई FIR के बाद चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्ष के आंदोलन के बीच एक बार फिर पुलिस कार्रवाई बनाम राजनीतिक विरोध का मुद्दा चर्चा में आ गया है।