रविवार को प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में आसमान साफ रहा और दिनभर धूप खिली रही। हालांकि कई जगह हल्की हवा चलने से तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई, जिससे लोगों को उमस से कुछ राहत मिली। प्रदेश में सबसे अधिक गर्मी श्रीगंगानगर में रही, जहां अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा पिलानी, चूरू, फलोदी, बीकानेर और जैसलमेर में भी अधिकतम तापमान 35 डिग्री से ऊपर रहा।
मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक बंगाल की खाड़ी में पश्चिमी बंगाल और ओडिशा तट के पास लो-प्रेशर सिस्टम बना हुआ है। इसके अगले 24 घंटे में और मजबूत होकर वेलमार्क लो-प्रेशर एरिया में तब्दील होने की संभावना है। इस सिस्टम के प्रभाव से आने वाले दिनों में मानसून के कोर-जोन में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
इस कोर-जोन में ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान शामिल हैं। ऐसे में सिस्टम के मजबूत होने के साथ राजस्थान में भी बारिश का इंतजार खत्म होने की उम्मीद जताई जा रही है।
वर्तमान में मानसून ट्रफ अमृतसर, मुजफ्फरनगर, बरेली, गोरखपुर, पटना और जमशेदपुर होते हुए बंगाल की खाड़ी तक गुजर रही है। मौसम परिस्थितियों में बदलाव के बाद राजस्थान के कई हिस्सों में बारिश का नया दौर देखने को मिल सकता है।
मौसम केंद्र जयपुर ने प्रदेश में अगले तीन दिनों के लिए मौसम मुख्यतः ड्राई रहने का पूर्वानुमान जारी किया है। इस दौरान अधिकांश हिस्सों में आसमान साफ रहने, धूप निकलने और तापमान में मामूली बढ़ोतरी होने की संभावना है।
हालांकि 2 सितंबर के बाद मौसम में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं। नए सिस्टम के असर से प्रदेश के कुछ हिस्सों में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं। ऐसे में सितंबर के पहले सप्ताह में राजस्थान के कई जिलों को बारिश की उम्मीद है।
राजधानी जयपुर में रविवार को पूरे दिन आसमान साफ रहा और तेज धूप निकली। दिन में हल्की हवा चलने से तापमान में मामूली गिरावट दर्ज हुई। जयपुर में अधिकतम तापमान 34 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस रहा।
मौसम विभाग के अनुसार जयपुर में अगले दो दिन मौसम शुष्क रहने की संभावना है। इसके बाद बंगाल की खाड़ी के सिस्टम के प्रभाव से मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है।
कोटा में रविवार को बारिश नहीं हुई। सुबह से ही धूप खिली रही। हालांकि अधिकतम तापमान में कुछ कमी दर्ज की गई। शहर में अधिकतम तापमान 33 डिग्री और न्यूनतम तापमान 24.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विभाग के अनुसार कोटा में सितंबर के पहले सप्ताह में बारिश होने की संभावना है। इससे लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
जोधपुर में रविवार को मौसम सामान्य रहा। सुबह आसमान में बादल छाए रहे और हल्की हवा चलती रही, जिससे मौसम में कुछ ठंडक बनी रही। शहर में अधिकतम तापमान 34.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से 0.1 डिग्री अधिक रहा। वहीं न्यूनतम तापमान 25.7 डिग्री रहा, जो सामान्य से 0.2 डिग्री अधिक है।
मौसम विभाग के अनुसार आगामी कुछ दिनों तक जोधपुर में बारिश का कोई अलर्ट नहीं है।
अलवर में पिछले चार दिनों से बारिश नहीं होने के कारण लोगों को उमस और गर्मी का सामना करना पड़ रहा है। सुबह करीब 8 बजे के बाद ही गर्मी बढ़ने लगती है। हालांकि बीच-बीच में चलने वाली हल्की ठंडी हवा से लोगों को थोड़ी राहत मिलती है।
अलवर में रविवार को अधिकतम तापमान 34.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
अजमेर जिले में भी मानसून एक बार फिर कमजोर पड़ गया है। रविवार सुबह से ही धूप खिली रही और गर्मी-उमस ने लोगों को परेशान किया। यहां अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 22.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
हालांकि पूरे मानसून सीजन की बात करें तो अजमेर में अब तक 419.0 MM बारिश दर्ज हो चुकी है, जबकि सामान्य तौर पर इस अवधि में 385 MM बारिश होनी चाहिए थी। यानी जिले में अब तक सामान्य से 8 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है।
उदयपुर में रविवार को मौसम का मिजाज बदला हुआ रहा। सुबह ठंडी हवा चली, जिससे मौसम सुहावना बना रहा। बाद में कभी धूप तो कभी बादल छाए रहे। उदयपुर में पिछले करीब दो सप्ताह से बारिश नहीं हुई है।
दिन के तापमान में 0.4 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज हुई। अधिकतम तापमान 30.5 डिग्री सेल्सियस रहा। अब लोगों को सितंबर के पहले सप्ताह में बारिश की उम्मीद है।
सीकर में रविवार को पूरे दिन मौसम साफ रहा। तेज धूप के साथ गर्मी और उमस ने लोगों को परेशान किया। जिले में न्यूनतम तापमान 23.5 डिग्री और अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
कुल मिलाकर राजस्थान में फिलहाल मानसून की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं। 1 सितंबर तक प्रदेश में मौसम मुख्यतः शुष्क रहने के बाद 2 सितंबर से बारिश की गतिविधियों में बढ़ोतरी की संभावना है। अब सभी की नजरें बंगाल की खाड़ी में बने लो-प्रेशर सिस्टम की दिशा और उसकी मजबूती पर टिकी हैं।