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जैश-ए-मोहम्मद ऑपरेटिव हमीम मंडल पर STF का बड़ा दावा, जंतर-मंतर प्रदर्शन में तोड़फोड़ की साजिश रचने का आरोप

कोलकाता। पश्चिम बंगाल STF ने बर्धमान जिले से गिरफ्तार किए गए कथित जैश-ए-मोहम्मद ऑपरेटिव हमीम मंडल को लेकर कई गंभीर दावे किए हैं। STF के मुताबिक, हमीम ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले एक प्रदर्शन में हिंसा और तोड़फोड़ की साजिश रची थी। जांच एजेंसी का दावा है कि वह पुलिस की वर्दी पहनकर प्रदर्शन में घुसपैठ करने की योजना बना रहा था।

STF के आईजी गौरव शर्मा ने बताया कि जांच के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आई हैं। उनके अनुसार, हमीम के निशाने पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सहित कई बड़े नेता और पुलिस अधिकारी थे। STF का दावा है कि आरोपी पाकिस्तानी हैंडलर्स के संपर्क में था और उनके निर्देश पर राजनीतिक हस्तियों की गतिविधियों पर नजर रखने तथा संवेदनशील जानकारी जुटाने का काम कर रहा था।

जांच एजेंसी के अनुसार, हमीम के मोबाइल फोन और सोशल मीडिया चैट की जांच में व्हाट्सऐप, टेलीग्राम और इंस्टाग्राम के जरिए विदेशी संपर्कों के संकेत मिले हैं। STF का कहना है कि आरोपी एन्क्रिप्टेड चैट और विदेशी सिम कार्ड का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स से संपर्क करता था। इन संपर्कों के लिए कथित तौर पर कोडनेम जैसे राणा, अबीर, हबीब और 333 का इस्तेमाल किया जाता था।

STF ने यह भी दावा किया है कि हमीम और उसकी कथित सहयोगी अर्पिता ने मिलकर पश्चिम बंगाल के एक राज्य मंत्री के बेटे को हनी-ट्रैप में फंसाने की साजिश रची थी। एजेंसी के अनुसार, योजना मंत्री के बेटे को फंसाकर उसे अगवा करने और परिवार से पैसे वसूलने की थी। जांच अधिकारियों का कहना है कि इस पूरे मामले में और कितने लोग शामिल हैं, इसकी जांच जारी है।

STF के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि इस साजिश के पीछे एक संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। अधिकारियों के मुताबिक, आरोपियों ने प्रभावशाली लोगों के साथ निजी संबंध बनाकर संवेदनशील जानकारियां हासिल करने की योजना बनाई थी।

जांच में सामने आया कि अर्पिता और हमीम करीब चार साल से संपर्क में थे। दोनों की पहचान पहले इंस्टाग्राम के जरिए हुई और बाद में व्यक्तिगत मुलाकातें भी हुईं। STF का दावा है कि आरोपियों के पास से यूनाइटेड किंगडम और मेक्सिको में जारी इंटरनेशनल सिम कार्ड भी बरामद किए गए हैं।

STF के अनुसार, 23 वर्षीय हमीम हावड़ा में काम करता था। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले वह बर्धमान चला गया था, जहां उसने एक अपार्टमेंट किराए पर लिया था। जांच एजेंसियों से बचने के लिए वह पिछले कुछ महीनों से छिपकर रह रहा था।

STF का दावा है कि हमीम करीब एक साल पहले सोशल मीडिया के जरिए एक आतंकी मॉड्यूल के संपर्क में आया था। एजेंसी के अनुसार, इस मॉड्यूल को कथित तौर पर गैंगस्टर शहजाद भट्टी और उसके सहयोगी अजमल गुज्जर चला रहे थे।

जांच एजेंसी के मुताबिक, हमीम को मुख्यमंत्री की गतिविधियों पर नजर रखने और उन स्थानों की जानकारी जुटाने का निर्देश दिया गया था, जहां वे बिना ज्यादा सुरक्षा के जा सकते हैं। हालांकि इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है।

STF ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले की जानकारी दी। अधिकारियों के मुताबिक, जांच की शुरुआत उस इनपुट के बाद हुई जिसमें एक मंत्री के बेटे को हनी-ट्रैप के जरिए फंसाकर पैसे ऐंठने और अपहरण की साजिश की जानकारी मिली थी। जांच के दौरान साहिबगंज के एक सोशल मीडिया अकाउंट की जानकारी सामने आई, जिसे कथित तौर पर अर्पिता सरकार संचालित कर रही थी। इसी अकाउंट की जांच के बाद STF हमीम मंडल तक पहुंची।