मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच तेल और गैस क्षेत्रों में लगने वाली भीषण आग पर काबू पाने के लिए कई विशेष तकनीकों का उपयोग किया जाता है. ये आग पारंपरिक आग की तुलना में अधिक खतरनाक होती हैं क्योंकि इनमें ईंधन (कच्चा तेल या गैस) की आपूर्ति लगातार बनी रहती है, जिससे आग का तापमान 1000 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच सकता है. इन बड़ी औद्योगिक आग पर नियंत्रण पाने के मुख्य तरीके इस प्रकार हैं:
* पानी के स्प्रे से ठंडा करना (Water Spray Cooling): आग की लपटों के तापमान को कम करने और आस-पास की संरचनाओं को ठंडा रखने के लिए पानी का भारी मात्रा में छिड़काव किया जाता है.
* डायनामाइट विस्फोट (Dynamite Blast/Explosion): यह एक प्रभावी तरीका है जिसमें आग के मुहाने के पास नियंत्रित विस्फोट किया जाता है. विस्फोट से उत्पन्न जोरदार शॉकवेव आग के आसपास की ऑक्सीजन को कुछ पलों के लिए हटा देती है, जिससे आग बुझ जाती है.
* फोम या ड्राई केमिकल (Foam or Dry Chemical): आग बुझाने वाले फोम को तेल की सतह पर फैलाया जाता है, जो हवा के संपर्क को काट देता है और आग को बुझाता है. ड्राई केमिकल पाउडर भी दहन प्रतिक्रिया को बाधित करके आग बुझाने में सहायक होता है और जलती हुई सतह को ढक देता है.
* गैस टर्बाइन मिस्ट (Gas Turbine Mist): इस विधि में एक बड़े टर्बाइन इंजन का उपयोग करके पानी की महीन फुहार आग के आधार पर फेंकी जाती है, जिससे आग बुझाने में मदद मिलती है.
* रिलीफ वेल ड्रिलिंग (Relief Well Drilling): इसे सबसे सुरक्षित और स्थायी तरीकों में से एक माना जाता है. इसमें आग लगे हुए कुएं के पास एक नया कुआं खोदा जाता है, ताकि दबाव को कम किया जा सके और तेल या गैस के प्रवाह को मोड़ा जा सके, जिससे आग के लिए ईंधन की आपूर्ति बंद हो जाती है.
* मैकेनिकल कैपिंग (Mechanical Capping): इस तरीके में कुएं को यांत्रिक रूप से बंद कर दिया जाता है, जिससे ईंधन का प्रवाह रुक जाता है.
इन तकनीकों का उपयोग विशेषज्ञ टीमों द्वारा किया जाता है जो ऐसी भीषण आग से निपटने के लिए गहन प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं. आग पर काबू पाने के बाद, कुएं और आसपास के उपकरणों पर तुरंत पानी का छिड़काव किया जाता है ताकि जगह को ठंडा किया जा सके. तेल और गैस के कुओं में आग का लगातार ईंधन स्रोत के कारण खतरनाक होना और 1991 के कुवैत युद्ध में सद्दाम हुसैन द्वारा जलाए गए 600 से अधिक कुओं का उदाहरण इसकी भयावहता को दर्शाता है.