सर्दियों में दांतों की सेंसिटिविटी एक आम समस्या है, जिससे लगभग 12.5% आबादी प्रभावित होती है. व्हाइट टस्क क्लिनिक की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में ठंड बढ़ते ही सेंसिटिविटी के मामलों में उछाल आ जाता है. यह समस्या कैविटी, मसूड़ों की बीमारी और दांतों में संक्रमण का कारण बन सकती है. सर्दियों में सूखी हवा, कम पानी पीना और साइनस की समस्या इसे और बढ़ा देती है.
श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट, दिल्ली के डेंटल सर्जरी के डायरेक्टर, डॉ. पुनीत आहूजा के अनुसार, दांतों की सेंसिटिविटी तब होती है जब दांत के क्राउन पर चोट लगती है या मसूड़े नीचे खिसकते हैं, जिससे दर्द, सूजन या गर्म-ठंड से झनझनाहट महसूस होती है.
सर्दियों में टूथ सेंसिटिविटी की समस्या क्यों बढ़ जाती है?
सर्दियों में दांतों में झनझनाहट या तेज चुभन के पीछे सिर्फ ठंडा मौसम ही नहीं, बल्कि दांतों और मसूड़ों से जुड़ी कई अंदरूनी वजहें होती हैं. तापमान में बदलाव, ओरल हेल्थ की समस्याएं और कुछ रोजमर्रा की आदतें मिलकर सेंसिटिविटी को बढ़ा देती हैं:
* एनामेल का घिसना: ठंड लगने पर दांत और एनामेल सिकुड़ते हैं, और गर्म चीजों के संपर्क में आने पर फैलते हैं. इस प्रक्रिया से एनामेल में महीन दरारें पड़ सकती हैं, जो ठंड में चुभन का कारण बनती हैं.
* मसूड़ों का सिकुड़ना: मसूड़ों में सूजन या बीमारी से दांतों की जड़ें खुल जाती हैं, जिससे ठंड-गर्म पर तेज दर्द होता है.
* मसूड़ों की कोई बीमारी: जिंजिवाइटिस या पीरियोडॉन्टाइटिस जैसी बीमारियों में मसूड़े कमजोर होकर पीछे हटने लगते हैं, जिससे दांतों की जड़ें संवेदनशील हो जाती हैं.
* डेन्टिन एक्सपोज होना: जब एनामेल घिसता है, तो अंदर की डेन्टिन लेयर खुल जाती है, जो तापमान के प्रति अधिक संवेदनशील होती है.
* प्लाक जमना: मसूड़ों की बीमारियों के कारण मसूड़े कमजोर होकर पीछे हटते हैं, जिससे दांतों की जड़ें खुल जाती हैं और वे ठंड-गर्म के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं.
* मुंह में ड्राइनेस: सर्दियों में नमी कम होने और पानी कम पीने से लार कम बनती है, जिससे मुंह सूखता है और सेंसिटिविटी बढ़ती है.
* कैविटी होना: दांतों में कैविटी होने से एनामेल में छेद हो जाता है और अंदर की संवेदनशील परत प्रभावित होती है, जिससे ठंड में तेज दर्द हो सकता है.
* डेंटल ट्रीटमेंट: हाल ही में फिलिंग, क्राउन या व्हाइटनिंग ट्रीटमेंट के बाद कुछ समय के लिए सेंसिटिविटी रह सकती है.
* गलत खानपान: मीठा और एसिडिक खाना एनामेल को कमजोर करता है और सेंसिटिविटी बढ़ाता है.
* एनवायर्नमेंटल ड्राइनेस: सर्दियों की सूखी ठंडी हवा मुंह को सुखा देती है, जिससे दांतों की संवेदनशीलता बढ़ जाती है.
टूथ सेंसिटिविटी का इलाज क्या है?
दांतों की सेंसिटिविटी को नियंत्रित करने के लिए कई प्रभावी उपाय उपलब्ध हैं:
* सेंसिटाइजिंग टूथपेस्ट का उपयोग करें: ऐसे टूथपेस्ट चुनें जिनमें पोटेशियम नाइट्रेट या स्ट्रोंटियम क्लोराइड जैसे तत्व हों, जो तंत्रिका मार्गों को अवरुद्ध कर संवेदनशीलता को कम करते हैं.
* फ्लोराइड जेल लगाएं: फ्लोराइड जेल एनामेल को मजबूत करने और संवेदनशीलता कम करने में मदद करते हैं.
* डेंटल ट्रीटमेंट: यदि सेंसिटिविटी कैविटी या अन्य गंभीर समस्या के कारण है, तो डेंटिस्ट फिलिंग या रूट कैनाल जैसे उपचार की सलाह दे सकते हैं.
* माउथ गार्ड: यदि आप रात में दांत पीसते हैं, तो माउथ गार्ड एनामेल को खराब होने से बचा सकता है और संवेदनशीलता को कम कर सकता है.
टूथ सेंसिटिविटी से कैसे बचें?
दांतों की सेंसिटिविटी से बचने और उसे कम करने के लिए निम्नलिखित उपाय अपनाए जा सकते हैं:
* मुलायम ब्रिसल वाले टूथब्रश का उपयोग करें: कठोर ब्रिसल वाले टूथब्रश से एनामेल घिस सकता है. मुलायम ब्रिसल वाले ब्रश का उपयोग करें और धीरे-धीरे गोलाकार गति में ब्रश करें.
* एसिडिक और मीठे खाद्य पदार्थों से बचें: खट्टे फल, सोडा और सिरके वाले खाद्य पदार्थ एनामेल को नष्ट कर सकते हैं. मीठी चीजें बैक्टीरिया को आकर्षित करती हैं, जिससे संक्रमण और कैविटी का खतरा बढ़ता है.
* अच्छी मौखिक स्वच्छता बनाए रखें: दिन में दो बार ब्रश करें, नियमित रूप से फ्लॉस करें और फ्लोराइड माउथवॉश का उपयोग करें.
* रात में ब्रश करना न भूलें: रात में ब्रश किए बिना सोने से बचें.
* हाइड्रेटेड रहें: सर्दियों में पर्याप्त पानी पिएं ताकि मुंह में लार का उत्पादन बना रहे और ड्राइनेस से बचा जा सके.
* गुनगुने पानी का उपयोग करें: ठंडा पानी पीने से सेंसिटिविटी बढ़ सकती है, इसलिए गुनगुना पानी पिएं और बहुत गर्म भोजन से भी बचें.
* नियमित डेंटल चेकअप कराएं: साल में एक बार अल्ट्रासोनिक स्केलिंग करवाएं और किसी भी समस्या के लिए समय पर डेंटिस्ट से सलाह लें.
* ऑयल पुलिंग: नारियल तेल से ऑयल पुलिंग करने से बैक्टीरिया कम होते हैं और मसूड़ों का स्वास्थ्य बेहतर होता है, जिससे संवेदनशीलता कम हो सकती है.
* लौंग का तेल या लौंग चबाना: लौंग के तेल में यूजेनॉल होता है जो प्राकृतिक एनेस्थेटिक और एंटीबैक्टीरियल गुणों के कारण दर्द और सूजन को कम कर सकता है.
* नमक और सरसों के तेल से मालिश: नमक और सरसों के तेल से हल्की मालिश मसूड़ों में रक्त संचार बढ़ाती है और बैक्टीरिया खत्म करती है.