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शराब का सेवन न करने वाले व्यक्ति के लिवर में अत्यधिक फैट जमा

नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) एक ऐसी स्थिति है जिसमें शराब का सेवन न करने वाले व्यक्ति के लिवर में अत्यधिक फैट जमा हो जाता है। इसे अक्सर 'साइलेंट डिजीज' भी कहा जाता है, क्योंकि शुरुआती चरणों में इसके लक्षण अक्सर स्पष्ट नहीं होते हैं। हालांकि, जैसे-जैसे यह समस्या बढ़ती है, शरीर कुछ संकेत देना शुरू कर सकता है।

नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के लक्षण:

नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज के कुछ सामान्य लक्षण इस प्रकार हैं:
* थकान और कमजोरी महसूस होना
* पेट के ऊपरी दाहिने हिस्से में दर्द या बेचैनी
* पेट पर चर्बी का बढ़ना (विशेषकर पेट के आसपास)
* गर्दन की मोटाई बढ़ना
* भूख में कमी
* पेट में सूजन या भारीपन
* अचानक वजन घटना या बढ़ना
* त्वचा और आंखों का पीला पड़ना (पीलिया)
* उल्टी महसूस होना
* त्वचा पर धब्बेदार, गहरा रंग परिवर्तन जो आमतौर पर गर्दन और बांह के नीचे वाले क्षेत्र में पाया जाता है
* बढ़े हुए लिवर का पता चलना
* रक्त परीक्षण में लिवर एंजाइम (AST और ALT) का बढ़ा हुआ स्तर
* रक्त में ट्राइग्लिसराइड्स या कोलेस्ट्रॉल का उच्च स्तर
* गहरे रंग का पेशाब
* त्वचा पर खुजली या दाने
* बार-बार बुखार या संक्रमण

इससे बचने के उपाय:

नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज से बचाव और इसे ठीक करने के लिए जीवनशैली में बदलाव बहुत महत्वपूर्ण हैं।
वजन नियंत्रित रखें: फैटी लिवर का सबसे बड़ा कारण मोटापा है, इसलिए स्वस्थ वजन बनाए रखना या अतिरिक्त वजन कम करना सबसे महत्वपूर्ण उपाय है। एरोबिक एक्सरसाइज या जिम में वर्कआउट करने से वजन कम करने में मदद मिल सकती है।
स्वस्थ आहार अपनाएं:
* अपने आहार में मौसमी फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें और ड्राई फ्रूट्स शामिल करें।
* जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक, मीठे और शर्करा युक्त पदार्थ, तले हुए और पैकेज्ड या प्रोसेस्ड फूड से बचें।
* रेड मीट की बजाय फिश या कम फैट वाले चिकन का सेवन करें।
* खाना पकाने के लिए जैतून या कैनोला तेल का उपयोग करें।
* फाइबर युक्त भोजन का सेवन बढ़ाएं।
* सैचुरेटेड फैट का सेवन कम करें.
नियमित व्यायाम करें: रोजाना कम से कम 30 मिनट तक टहलना, दौड़ना, तैरना, साइकिल चलाना या योगा करना लिवर के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद है।
शराब से दूरी: हालांकि यह नॉन-एल्कोहॉलिक फैटी लिवर है, फिर भी शराब से पूरी तरह परहेज करने से लिवर को और नुकसान से बचाया जा सकता है।
पर्याप्त पानी पिएं: शरीर को हाइड्रेटेड रखने से लिवर के कार्य में मदद मिलती है।
अंतर्निहित स्थितियों का प्रबंधन: यदि आपको टाइप-2 डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर या हाई कोलेस्ट्रॉल जैसी मेटाबॉलिक संबंधी समस्याएं हैं, तो उन्हें नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है।
कॉफी का सेवन: कुछ शोध बताते हैं कि रोजाना दो कप कॉफी पीने से फैटी लिवर से बचाव हो सकता है।
विटामिन ई का सेवन: बादाम, अखरोट, ओट्स, एवोकाडो और बेरी जैसे खाद्य पदार्थों से विटामिन ई का सेवन बढ़ाने से भी मदद मिल सकती है।

यदि आपको NAFLD के कोई लक्षण महसूस होते हैं या आप जोखिम में हैं, तो तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना महत्वपूर्ण है।