गर्भाशय फाइब्रॉएड गर्भाशय (यूटिरस) में या उसके आसपास बनने वाली गैर-कैंसरकारी (नॉन-कैंसरस) गांठें होती हैं, जो मांसपेशियों और रेशेदार ऊतकों से बनी होती हैं. इन्हें यूटेरिन मायोमा या लियोमायोमा भी कहा जाता है. इनका आकार मटर के दाने जितना छोटा हो सकता है और कुछ इतने बड़े भी हो सकते हैं कि पेट में सूजन या उभार साफ नजर आने लगे.
जर्नल ऑफ कंटेम्पररी क्लिनिकल प्रैक्टिस (JCCP) की रिसर्च के अनुसार, दुनिया भर में 50 साल की उम्र तक हर 10 में से लगभग 7-8 महिलाओं को फाइब्रॉएड हो सकते हैं.
फाइब्रॉएड के कारण (Causes of Fibroids):
फाइब्रॉएड बनने का सटीक कारण पूरी तरह से स्पष्ट नहीं है, लेकिन कुछ अहम वजहें मानी जाती हैं:
* हार्मोन: एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन फाइब्रॉएड की ग्रोथ को बढ़ावा देते हैं. मेनोपॉज के बाद जब इन हार्मोनों का स्तर गिरता है, तो कई बार फाइब्रॉएड खुद ही छोटे हो जाते हैं.
* आनुवंशिकी (Genetic Factors): जिन महिलाओं के परिवार में गर्भाशय फाइब्रॉएड का इतिहास रहा है, उनमें इसके विकसित होने की संभावना अधिक होती है.
* मोटापा: अत्यधिक वजन या मोटापा शरीर में हार्मोनल असंतुलन पैदा कर सकता है, जिससे फाइब्रॉएड होने की संभावना बढ़ जाती है.
* लाइफस्टाइल और खान-पान: अत्यधिक जंक फूड, ज्यादा फैट और रेड मीट खाने से हार्मोनल असंतुलन हो सकता है. ज्यादा शराब और कैफीन का सेवन भी हार्मोनल गड़बड़ी का कारण बन सकता है. फल और सब्जियों की कमी से भी फाइब्रॉएड का खतरा बढ़ सकता है.
* गर्भाधारण का इतिहास: जिन महिलाओं की कोई संतान नहीं हुई है या जिनका पहला गर्भधारण देर से हुआ है, उनमें भी फाइब्रॉएड का खतरा बढ़ सकता है.
फाइब्रॉएड के लक्षण (Symptoms of Fibroids):
फाइब्रॉएड के लक्षण हर महिला में एक जैसे नहीं होते हैं. कई बार ये धीरे-धीरे बढ़ते हैं और शुरुआत में कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती है, लेकिन जैसे-जैसे फाइब्रॉएड का आकार बढ़ता है, शरीर इसके संकेत देने लगता है. कुछ सामान्य लक्षण हैं:
* मासिक धर्म में भारी या लंबे समय तक रक्तस्राव, जिसमें थक्के शामिल हो सकते हैं.
* पेल्विक (श्रोणि) दर्द या दबाव.
* बार-बार पेशाब आना या मूत्राशय खाली करने में कठिनाई.
* कब्ज या सूजन.
* पीठ के निचले हिस्से या पैरों में दर्द.
* यौन संबंध बनाने में दर्द होना.
* कमजोरी या एनीमिया (रक्त की कमी) महसूस करना.
* प्रजनन संबंधी समस्याएं, जैसे बार-बार गर्भपात या बांझपन.
* नाभि के नीचे पेट में दर्द या पीठ के निचले हिस्से में दर्द होना.
फाइब्रॉएड के प्रकार (Types of Fibroids):
फाइब्रॉएड को उनकी जगह के आधार पर चार मुख्य प्रकारों में बांटा जाता है:
* इंट्राम्यूरल फाइब्रॉएड: ये गर्भाशय की मांसपेशीय दीवार के अंदर होते हैं और सबसे आम प्रकार के होते हैं.
* सबम्यूकोसल फाइब्रॉएड: ये गर्भाशय की सबसे अंदर वाली परत (एंडोमेट्रियम) के ठीक नीचे बढ़ते हैं. यही वह परत है, जो पीरियड के लिए जिम्मेदार होती है. ये पीरियड्स में अधिक ब्लीडिंग और फर्टिलिटी संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं.
* सबसीरोसल फाइब्रॉएड: ये गर्भाशय की बाहरी सतह पर बनते हैं और बाहर की तरफ बढ़ते हैं. अगर ये बड़े हो जाएं, तो पेट के निचले हिस्से में इंफ्लेमेशन या उभार दिख सकता है और पेशाब की थैली या आंतों पर दबाव पड़ सकता है.
* पेडन्क्युलेटेड फाइब्रॉएड: ये कम पाए जाते हैं. ये गर्भाशय की दीवार से एक पतले जोड़ (जिसे पेडिकल कहते हैं) के जरिए जुड़े होते हैं. इनके कारण तेज दर्द और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है.
डॉक्टर को कब दिखाना जरूरी है (When to see a doctor):
आपको निम्नलिखित में से कोई भी लक्षण महसूस होने पर अपने डॉक्टर से परामर्श करना आवश्यक है:
* मासिक धर्म में भारी या लंबे समय तक रक्तस्राव होना.
* मासिक धर्म के दौरान असहनीय दर्द होना.
* पेल्विक दर्द या दबाव.
* बार-बार पेशाब आना या मूत्राशय खाली करने में कठिनाई.
* कब्ज या सूजन.
* प्रजनन संबंधी समस्याएँ, जैसे बार-बार गर्भपात या बांझपन.
* यदि आपके पीरियड्स 7 दिनों से अधिक समय तक चलते हैं.
* यदि आप पेट के निचले हिस्से में दर्द या भारीपन महसूस करती हैं.
डॉ. गीता जैन, HOD, ऑब्स्टेट्रिक्स, गायनेकोलॉजी एंड आईवीएफ, मैक्योर हॉस्पिटल, दिल्ली के अनुसार, कई महिलाएं अल्ट्रासाउंड कराने तक अपनी परेशानियों को सामान्य समझती हैं. लेकिन यदि फाइब्रॉएड परेशानी दे रहा है, तो छोटे आकार का होने पर भी इसे उपचार की आवश्यकता होती है. जल्दी पता लगाने और चिकित्सा उपचार से बड़े या लक्षण वाले फाइब्रॉएड से जुड़ी जटिलताओं को रोका जा सकता है.