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2029 की PM रेस में विजय की एंट्री? TVK नेताओं के बयानों से गरमाई सियासत, राहुल गांधी से मुकाबले के संकेत

चेन्नई। साल 2029 के लोकसभा चुनाव को लेकर देश की राजनीति में अभी से चर्चाएं तेज हो गई हैं। कांग्रेस की ओर से राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के प्रमुख चेहरे के तौर पर प्रोजेक्ट किए जाने के बीच तमिलनाडु की राजनीति में भी एक नया नाम उभरता नजर आ रहा है। तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) के नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय को पार्टी के भीतर देश के अगले नेतृत्वकर्ता के रूप में पेश किए जाने की चर्चा शुरू हो गई है।

हालांकि विजय ने खुद प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के बयानों ने 2029 की सियासी तस्वीर को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

मंत्री एम. शरतकुमार के बयान से बढ़ी चर्चा

प्रधानमंत्री पद को लेकर यह चर्चा 18 अगस्त को तमिलनाडु सरकार में मंत्री एम. शरतकुमार के बयान के बाद तेज हुई। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय की तारीफ करते हुए कहा कि जो नेता राज्य की जनता के दिलों में जगह बनाता है, वही देश का नेतृत्व करने की क्षमता रखता है।

शरतकुमार ने विजय की कार्यशैली की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे लगातार जनता के लिए काम करते हैं और आने वाले समय में देश की कमान संभाल सकते हैं। उनके इस बयान के बाद TVK के भीतर विजय को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने की संभावनाओं को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं।

पहले भी उठ चुकी है दक्षिण भारत से PM बनाने की मांग

इससे पहले TVK के एक अन्य नेता आधव अर्जुन भी दक्षिण भारत से प्रधानमंत्री बनाए जाने की मांग उठा चुके हैं। उन्होंने कहा था कि देश की राजनीति में अब ऐसा दौर आना चाहिए, जिसमें प्रधानमंत्री पद को लेकर सिर्फ उत्तर प्रदेश, बिहार या गुजरात जैसे राज्यों के राजनीतिक समीकरणों पर निर्भरता न हो।

उनका तर्क था कि दक्षिणी राज्य देश की अर्थव्यवस्था और नीतिगत योगदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ऐसे में दक्षिण भारत की राजनीतिक आवाज को देश के सर्वोच्च कार्यकारी पद तक पहुंचने का अवसर मिलना चाहिए।

इन बयानों के बाद विजय के राष्ट्रीय राजनीति में संभावित विस्तार को लेकर अटकलें शुरू हो गई हैं।

TVK और कांग्रेस के बीच गठबंधन, लेकिन PM चेहरे पर अलग राय

तमिलनाडु में TVK और कांग्रेस के बीच गठबंधन की राजनीति चल रही है। हालिया विधानसभा चुनाव में 234 सीटों वाली विधानसभा में TVK को 108 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस को पांच सीटों पर जीत मिली। इसके बाद कांग्रेस ने विजय के नेतृत्व वाली सरकार को समर्थन दिया। VCK और वामपंथी दलों के सहयोग से सरकार का गठन हुआ।

गठबंधन को लेकर कांग्रेस की ओर से यह संकेत दिए गए थे कि सहयोग आगामी निकाय, राज्यसभा और लोकसभा चुनावों में भी जारी रहेगा। लेकिन प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर दोनों दलों की सोच अलग नजर आ रही है।

कांग्रेस के तमिलनाडु अध्यक्ष मणिकम टैगोर पहले ही कह चुके हैं कि 2029 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का लक्ष्य राहुल गांधी को देश का प्रधानमंत्री बनाना है। ऐसे में गठबंधन में शामिल TVK नेताओं द्वारा विजय को भविष्य के राष्ट्रीय नेतृत्वकर्ता के रूप में पेश किए जाने से राजनीतिक समीकरणों को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

DMK से दूरी के बाद बदली तमिलनाडु की राजनीति

कांग्रेस ने लंबे समय से सहयोगी रहे द्रविड़ मुन्नेत्र कषगम (DMK) से दूरी बनाकर TVK के साथ राजनीतिक गठजोड़ किया है। इससे तमिलनाडु की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।

DMK और कांग्रेस गठबंधन ने 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों में तमिलनाडु में मजबूत प्रदर्शन किया था। ऐसे में कांग्रेस के TVK के साथ जाने के फैसले से DMK में नाराजगी देखने को मिली। डीएमके ने कांग्रेस के फैसले को राजनीतिक धोखे के तौर पर भी बताया।

अब 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले TVK की ओर से विजय को राष्ट्रीय राजनीति में संभावित चेहरे के रूप में पेश किए जाने की चर्चा ने तमिलनाडु के साथ-साथ राष्ट्रीय राजनीति में भी नई बहस शुरू कर दी है।

2029 में किसके नेतृत्व में बनेगा विपक्षी समीकरण?

फिलहाल विजय की ओर से प्रधानमंत्री पद की दावेदारी को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। लेकिन पार्टी नेताओं के लगातार आ रहे बयानों से यह जरूर साफ है कि TVK मुख्यमंत्री विजय की लोकप्रियता को तमिलनाडु से बाहर राष्ट्रीय स्तर तक ले जाने की कोशिश कर रही है।

दूसरी ओर कांग्रेस राहुल गांधी को 2029 के लिए अपना प्रमुख चेहरा मानकर आगे बढ़ रही है। ऐसे में यदि कांग्रेस और TVK का गठबंधन भविष्य में भी कायम रहता है, तो प्रधानमंत्री पद के चेहरे को लेकर दोनों दलों के बीच सहमति कैसे बनेगी, यह बड़ा राजनीतिक सवाल होगा।

फिलहाल विजय को लेकर हो रही यह चर्चा शुरुआती दौर में है, लेकिन 2029 के लोकसभा चुनाव से काफी पहले ही दक्षिण भारत की राजनीति से प्रधानमंत्री पद के संभावित चेहरे की आवाज उठना राष्ट्रीय सियासत के लिए महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।