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नाथद्वारा में नाम वापसी को लेकर हाई-वोल्टेज ड्रामा, भाजपा प्रत्याशी दिनेश प्रजापत को रोकने दौड़े कार्यकर्ता; पुलिस ले गई साथ

नाथद्वारा। नगरपालिका चुनाव में नाम वापसी के दौरान नाथद्वारा उपखंड कार्यालय में उस समय सियासी पारा चढ़ गया, जब वार्ड नंबर 23 से भाजपा प्रत्याशी दिनेश प्रजापत नामांकन वापस लेने पहुंच गए। प्रजापत के नाम वापसी की चर्चा पहले से ही राजनीतिक गलियारों में चल रही थी। जैसे ही उनके उपखंड कार्यालय पहुंचने की जानकारी भाजपा कार्यकर्ताओं को मिली, वे उन्हें रोकने के लिए मौके पर पहुंच गए।

इसी दौरान कांग्रेस कार्यकर्ता भी वहां पहुंच गए और दोनों दलों के समर्थक आमने-सामने आ गए। कुछ ही देर में माहौल तनावपूर्ण हो गया और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी गहमागहमी शुरू हो गई।

पुलिस ने भाजपा प्रत्याशी को अपने साथ लिया

दोपहर करीब 1:05 बजे दिनेश प्रजापत नामांकन वापस लेने के लिए उपखंड कार्यालय पहुंचे थे। वे कार्यालय के निचले तल तक पहुंच चुके थे। इसी बीच दोनों दलों के कार्यकर्ताओं ने उन्हें घेर लिया।

स्थिति बिगड़ती देख मौके पर मौजूद पुलिस ने हस्तक्षेप किया और भाजपा प्रत्याशी को कार्यकर्ताओं के बीच से निकालकर अपने साथ ले गई। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद कांग्रेस कार्यकर्ता और पदाधिकारी नाराज हो गए।

कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने पुलिस-प्रशासन पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए नारेबाजी की। कुछ कार्यकर्ता विरोध में धरने पर भी बैठ गए।

महज तीन मिनट में बदल गया पूरा माहौल

नाम वापसी के दिन उपखंड कार्यालय पहुंचने से लेकर पुलिस द्वारा प्रत्याशी को अपने साथ ले जाने तक करीब तीन मिनट के घटनाक्रम ने पूरे नाथद्वारा के चुनावी माहौल को गरमा दिया। देखते ही देखते बड़ी संख्या में दोनों दलों के कार्यकर्ता मौके पर जुट गए।

इस घटनाक्रम के बाद वार्ड 23 का चुनावी मुकाबला और ज्यादा चर्चा में आ गया है। यहां भाजपा के दिनेश प्रजापत के सामने कांग्रेस की ओर से पूर्व जिलाध्यक्ष देवकीनंदन गुर्जर के पुत्र अजय गुर्जर चुनाव मैदान में हैं।

चुनावी रणनीति पर चर्चाओं का दौर

नामांकन वापसी के अंतिम दौर में सामने आए इस घटनाक्रम ने नाथद्वारा की सियासत में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। शहर में दोनों प्रमुख दलों की चुनावी रणनीति, प्रत्याशियों की स्थिति और वार्ड 23 के समीकरणों को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है।

मतदान से पहले ही वार्ड 23 में सामने आए इस हाई-वोल्टेज घटनाक्रम ने नगरपालिका चुनाव की सियासी तस्वीर को और दिलचस्प बना दिया है।