जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने राज्य की कानून-व्यवस्था और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने नीट पेपर लीक प्रकरण में सरकार की 'खामोशी' और राजनीतिक द्वेष के चलते की जा रही कार्रवाइयों पर तल्ख तेवर दिखाए।
नीट परीक्षा में हुई धांधली पर गहलोत ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए कहा:
शर्मनाक स्थिति: "नीट का पेपर राजस्थान से आउट होना क्या सरकार के लिए शर्म की बात नहीं है? एसओजी (SOG) खुद इस बात को मान रही है।"
अवैध हिरासत का आरोप: गहलोत ने दावा किया कि 30-40 लोगों को अवैध रूप से हिरासत में रखा गया है। उन्होंने सवाल किया कि अगर इन्होंने बेईमानी की है, तो सरकार उन पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई क्यों नहीं कर रही?
OMR शीट का मुद्दा: उन्होंने आरोप लगाया कि ओएमआर शीट से जुड़ी गड़बड़ियों को दबाया जा रहा है क्योंकि इसमें सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों के नाम सामने आ रहे थे।
जल जीवन मिशन घोटाले में पूर्व मंत्री महेश जोशी की गिरफ्तारी के तरीके पर नाराजगी जताते हुए गहलोत ने कहा:
"क्या वो भाग रहे थे?": "सुबह पांच बजे आप किसी को उठाकर ले जा रहे हो, क्या वो भाग रहे थे? एसीबी पहले बात कर सकती थी, नोटिस दे सकती थी।"
डराने की राजनीति: उन्होंने कहा कि डराने और धमकाने की यह राजनीति ज्यादा दिन नहीं चलेगी। "सत्ता हमेशा परमानेंट नहीं रहती, यह बात याद रखनी चाहिए।"
गहलोत ने एसीबी की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज अधिकारी ऊपर के दबाव में काम कर रहे हैं।
अधिकारियों को नसीहत: "एसीबी डीजी भले आदमी हैं, लेकिन वे दबाव में हैं और चाहकर भी निष्पक्ष काम नहीं कर पा रहे। नीचे के अधिकारी सीधे ऊपर के आदेशों पर गलत कार्रवाइयां कर रहे हैं।"
निष्पक्ष जांच की मांग: उन्होंने स्पष्ट किया कि अगर कोई भ्रष्ट है या गलत किया है, तो कार्रवाई कीजिए और सजा दिलवाइए, हमें कोई ऐतराज नहीं है। लेकिन कार्रवाई का तरीका संवैधानिक होना चाहिए।
अपने कार्यकाल का बचाव करते हुए गहलोत ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान जब भी पेपर लीक हुआ, बिना देरी के कार्रवाई की गई और पेपर रद्द किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने केवल राजनीति के लिए उन्हें बदनाम किया, जबकि आज उनके अपने शासन में पेपर लीक की घटनाएं हो रही हैं। गहलोत के इस बयान के बाद प्रदेश की सियासत में एक बार फिर 'पेपर लीक' और 'एजेंसी के दुरुपयोग' के मुद्दे पर बहस छिड़ गई है।