जयपुर: पचपदरा रिफाइनरी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दौरे से महज 24 घंटे पहले लगी आग ने राजस्थान की सियासत गरमा दी है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। गहलोत ने स्पष्ट कहा कि नई रिफाइनरी में इस तरह की आग लगना तकनीकी रूप से असंभव सा लगता है।
अशोक गहलोत ने इस हादसे के तकनीकी पहलुओं पर सवाल उठाते हुए अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों का हवाला दिया।
एक्सपर्ट की राय: गहलोत ने बताया, "मैंने आज ऑस्ट्रेलिया के विशेषज्ञों से बात की। उनका कहना है कि 20-25 साल पुरानी रिफाइनरी में आग लगना कोई बड़ी बात नहीं है, लेकिन नई रिफाइनरी में ऐसा नहीं होता।"
साजिश की आशंका: उन्होंने अंदेशा जताया कि इसके पीछे कोई सबोटाज (तोड़फोड़) या गहरी साजिश भी हो सकती है, जिसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।
पूर्व सीएम ने प्रधानमंत्री की सुरक्षा और रिफाइनरी के कामकाज पर सवाल उठाते हुए कहा:
SPG की मौजूदगी: "देश का प्रधानमंत्री कहीं जा रहा हो और इतनी बड़ी दुर्घटना हो जाए, इसे मामूली नहीं मान सकते। वहां दो-तीन दिन पहले से एसपीजी तैनात रहती है।"
मनोवैज्ञानिक दबाव: गहलोत ने आशंका जताई कि उद्घाटन की तारीख के कारण प्रोजेक्ट को जल्दबाजी में पूरा करने का मनोवैज्ञानिक दबाव रहा होगा। उन्होंने कहा कि "सेफ्टी फर्स्ट" के सिद्धांत को नजरअंदाज कर प्रोडक्शन पर ध्यान देना दुर्भाग्यपूर्ण है।
रिफाइनरी के साथ-साथ अशोक गहलोत ने किसानों की बदहाली का मुद्दा भी पुरजोर तरीके से उठाया।
कर्ज माफी की मांग: गहलोत ने सरकार से मांग की कि जिस तरह उनकी सरकार ने किसानों का कर्ज माफ किया था, वर्तमान सरकार को भी उसी तर्ज पर तुरंत कर्ज माफी की घोषणा करनी चाहिए।
किसानों की परेशानी: उन्होंने कहा कि प्रदेश का किसान भारी संकट में है और वह सरकार की ओर उम्मीद से देख रहा है।
गहलोत ने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा कि यह घटना प्रशासन और प्रबंधन की बड़ी चूक है। उन्होंने मांग की कि इस पूरे प्रकरण की जांच किसी निष्पक्ष एजेंसी से कराई जाए ताकि सच सामने आ सके कि आग लगने का असली कारण तकनीकी खराबी थी, जल्दबाजी की चूक या फिर कोई सोची-समझी साजिश।