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गहलोत का बड़ा हमला: "बार-बार लीक हो रहे पेपर, भंग हो NTA"; केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को बताया 'मानेसर कांड' का मुख्य किरदार

 

जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने नीट-2026 परीक्षा रद्द होने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि परीक्षाओं का आयोजन कराने में नाकाम साबित हो चुकी NTA को तुरंत भंग कर दिया जाना चाहिए।

 

"जब परीक्षा करा नहीं पा रहे, तो NTA को भंग करो"

गहलोत ने नीट पेपर लीक मामले में केंद्र सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए कहा:

  • राज्यों को मिले अधिकार: "जब आप बार-बार पेपर लीक करवा रहे हो, इसे रोक नहीं पा रहे हो और सही से एग्जाम तक नहीं करा पा रहे, तो NTA को भंग कर देना चाहिए। पहले प्रवेश परीक्षाओं का अधिकार राज्यों के पास था, यह अधिकार वापस राज्यों को सौंप देना चाहिए।"

  • 3 साल के घपले की हो जांच: उन्होंने आरोप लगाया कि नीट का पेपर साल 2024, 2025 और 2026 में लगातार तीनों बार लीक हुआ है। "अगर केंद्र सरकार में हिम्मत है, तो सिर्फ इस बार की नहीं बल्कि पिछले तीन सालों के पेपर लीक मामलों की जांच भी सीबीआई (CBI) को सौंपे।"

 

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर साधा निशाना

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान द्वारा नीट परीक्षा को ऑनलाइन मोड में कराने की घोषणा पर तंज कसते हुए गहलोत ने उनके अतीत को कुरेदा:

  • मानेसर कांड का जिक्र: "धर्मेंद्र प्रधान तो हमारे लिए 'मानेसर कांड' (राजस्थान कांग्रेस में हुई सियासी बगावत) के मैनेजमेंट के मुख्य किरदार थे। मैं इस पर कुछ भी बोलूंगा, तो वे कहेंगे कि मैं जानबूझकर उनके खिलाफ बोल रहा हूं।"

 

"जनता की परवाह नहीं, ओएमआर शीट घोटाला दबाया"

गहलोत ने आरोप लगाया कि पिछली बार जिन लोगों ने पेपर लीक का फायदा उठाया था, वही सिंडिकेट इस बार भी सक्रिय था। उन्होंने कहा कि इनके शासन में चाहे कोई बड़ा घोटाला हो जाए या ओएमआर शीट का फर्जीवाड़ा उजागर हो जाए, इनकी अप्रोच ऐसी है कि इन्हें देश के युवाओं और आम जनता के भविष्य की कोई चिंता नहीं है। इन्हें केवल अपनी सत्ता बचाने से मतलब है।

 

"धर्म के नाम पर राजनीति लोकतंत्र के लिए खतरा"

बीजेपी की राजनीतिक कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सत्तापक्ष को सुशासन (Good Governance) से कोई सरोकार नहीं है।

  • हिंदू कब तक बर्दाश्त करेगा?: "ये सिर्फ हिंदू की बात करते हैं और चुनाव जीत जाते हैं। लेकिन हिंदू भी इन्हें कब तक सहन करेगा? अब आम लोग भी समझने लगे हैं कि धर्म के नाम पर उन्हें क्या मिल रहा है।"

  • महंगाई का असर: उन्होंने सवाल उठाया, "जब देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ते हैं और महंगाई चरम पर पहुंचती है, तो क्या हिंदू तकलीफ में नहीं आता? धर्म के नाम पर राजनीति करने की यह अप्रोच बहुत खतरनाक है और हमारी डेमोक्रेसी (लोकतंत्र) के लिए बड़ा खतरा है।"

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