जयपुर: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने केंद्र सरकार की नीतियों और चुनावी व्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया है। गहलोत ने देश की युवा पीढ़ी को आगाह करते हुए कहा कि यदि समय रहते देश के हालात पर ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले दिनों में भारत में लोकतंत्र सिर्फ नाम का रह जाएगा और स्थितियां रूस व चीन जैसी हो जाएंगी।
अशोक गहलोत ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर सवाल उठाते हुए भाजपा नेताओं पर सीधे आरोप लगाए:
जजों को धमकी: गहलोत ने कहा, "आज देश की ज्यूडिशरी (न्यायपालिका) भारी दबाव में काम कर रही है। बीजेपी के नेता जजों को फोन करके धमकाते हैं। अब तो जजों के पास सीधे फोन जाते हैं।"
कांग्रेस शासन से तुलना: उन्होंने अपने कार्यकाल का उदाहरण देते हुए कहा, "हमने अपनी पूरी जिंदगी में कभी किसी मुकदमे की पैरवी या पैर पसारने के लिए किसी जज को फोन नहीं किया। पहले जज बनाने में मुख्यमंत्रियों की राय और हाथ होता था, हमने भी कई जज बनाने में मदद की, लेकिन कभी गरिमा नहीं लांघी। आज स्थितियां बदल चुकी हैं।"
पैसे का खेल: उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बीजेपी के पास एकतरफा अथाह पैसा है, जबकि चुनाव के वक्त कांग्रेस के खाते ही बंद कर दिए गए।
लोकसभा चुनावों के दौरान सुरक्षा बलों की तैनाती और चुनावी माहौल को लेकर पूर्व सीएम ने केंद्र को घेरा:
सुरक्षा बलों का असंतुलन: गहलोत ने कहा कि पूरे देश में लोकसभा चुनाव संपन्न कराने के लिए जहां 3 लाख सुरक्षाकर्मियों की जरूरत होती है, वहीं अकेले पश्चिम बंगाल में 2.5 लाख सुरक्षाकर्मी लगा दिए गए। वहां कई आईपीएस (IPS) अधिकारियों ने खुलेआम उम्मीदवारों को धमकाया।
रूस-चीन जैसे हालात की आशंका: उन्होंने चेतावनी दी कि अगर पश्चिम बंगाल की तरह पूरे देश में चुनाव होने लगे तो लोकतंत्र नहीं बचेगा। बाकी राज्यों में बंगाल की तरह लड़ाकू लोग नहीं हैं; अगर वहां बीजेपी ने ऐसी गुंडागर्दी की तो देश बर्बाद हो जाएगा। चुनाव सिर्फ नाम के रह जाएंगे, जैसे रूस और चीन में होते हैं। इस स्थिति का नुकसान सबसे ज्यादा युवाओं को भुगतना पड़ेगा।
गहलोत ने मतदाता सूचियों (SIR) में गड़बड़ी और बिहार-बंगाल के उदाहरणों का जिक्र करते हुए चुनाव आयोग को आड़े हाथों लिया:
वोटिंग अधिकार का हनन: पूर्व सीएम ने दावा किया कि एसआईआर में 27 लाख मतदाताओं के नाम काट दिए गए। इस पर सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी पर भी उन्होंने हैरानी जताई कि "इस बार नहीं तो अगली बार वोट दे देना।" गहलोत ने सवाल किया कि क्या ऐसी टिप्पणी जायज है? यह जनता से वोट का अधिकार छीनने जैसा है।
चुनाव स्थगित करने की मांग: उन्होंने कहा कि जब तक 27 लाख वोटों का फैसला नहीं हो जाता, तब तक बंगाल के चुनाव स्थगित होने चाहिए थे। पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त टीएन सेशन के दौर को याद करते हुए गहलोत ने कहा कि उनके समय में नियमों के उल्लंघन पर तमिलनाडु में उपचुनाव तक रोक दिए गए थे, लेकिन आज का चुनाव आयोग तो मोदी और एनडीए का एक विभाग बनकर रह गया है।
देशव्यापी मुद्दों के साथ-साथ गहलोत ने राजस्थान की भजनलाल सरकार को ईंधन की कीमतों और किल्लत पर घेरा:
वैट कम करने की मांग: पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ने का सीधा फायदा टैक्स के रूप में राज्य सरकार की तिजोरी को मिल रहा है। ऐसे में राज्य सरकार को तुरंत वैट (VAT) कम करके त्रस्त जनता को राहत देनी चाहिए।
पेट्रोल पंपों पर कतारें: उन्होंने प्रदेश सरकार पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार को जनता की तकलीफों की कोई परवाह नहीं है। सरकार आधिकारिक तौर पर झूठ बोल रही है कि राज्य में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है, जबकि हकीकत यह है कि हर शहर में पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की लंबी-लंबी लाइनें लग रही हैं।