Politics

राम मंदिर मामले पर गहलोत का बड़ा बयान, सीएम योगी को दिया नया अध्यक्ष बनने का सुझाव

जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत ने अयोध्या के राम मंदिर मामले को लेकर एक बड़ा बयान दिया है। गहलोत ने राम मंदिर के चढ़ावे में हुई कथित चोरी के मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में कराने की मांग की है। इसके साथ ही उन्होंने मौजूदा राम मंदिर ट्रस्ट को तुरंत भंग करने की वकालत की है। गहलोत ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को एक नया ट्रस्ट बनाने और खुद उसका अध्यक्ष पद संभालने का अनोखा सुझाव भी दिया है।

 

'चढ़ावा चोरी से हर हिंदू दुखी, यूपी की एसआईटी पर उठाए सवाल'

राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपों पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए अशोक गहलोत ने कहा:

"राम मंदिर के चढ़ावे में हुई चोरी से आज देश का हर हिंदू दुखी है और उनकी आस्था को गहरी चोट पहुंची है। इस पवित्र काम में भी चोरी हो जाए, इसकी चर्चा अब पूरे देश के अंदर हर गांव और हर घर में होने लग गई है। यह सीधे तौर पर जनता के साथ एक विश्वासघात है।"

गहलोत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित एसआईटी (SIT) पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह जांच टीम आनन-फानन में बनाई गई है, यहाँ तक कि एफआईआर दर्ज होने से पहले ही एसआईटी का गठन कर दिया गया। इसलिए इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष तहकीकात के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में जांच होना बेहद जरूरी है।

 

सीएम योगी को सुझाव: 'नया ट्रस्ट बनाएं, केवल RSS-BJP के लोग न रहें'

पूर्व मुख्यमंत्री ने मौजूदा ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर निशाना साधते हुए कहा कि इन्होंने केवल वीएचपी (VHP) और आरएसएस (RSS) के लोगों को ही ट्रस्ट में मेंबर बना दिया है और किसी की भी जिम्मेदारी तय नहीं की है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव के समय का उदाहरण देते हुए कहा कि उस दौरान ट्रस्ट में सभी विचारधाराओं के लोग शामिल थे, अगर वैसा ही ट्रस्ट बनता तो आज यह नौबत नहीं आती।


गहलोत ने यूपी के मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा:

"मैं योगी आदित्यनाथ जी से कहना चाहूंगा कि वे मौजूदा ट्रस्ट को भंग कर एक नया ट्रस्ट बनाएं और यूपी के सीएम होने के नाते वे खुद इसके अध्यक्ष बनें। इस नए ट्रस्ट में सभी तरह के लोगों को शामिल किया जाना चाहिए, न कि केवल आरएसएस और बीजेपी के लोगों को।"

 

'राम मंदिर के लिए हो रहा था अवैध खनन, मैंने चंपत राय को टोका था'

अशोक गहलोत ने राम मंदिर निर्माण के दौरान राजस्थान के पत्थरों के जुड़ाव को लेकर एक बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि जब मंदिर का निर्माण शुरू हो रहा था, तब राजस्थान के भरतपुर जिले के बंशी पहाड़पुर से अवैध खनन (Illegal Mining) करके पत्थर ले जाया जा रहा था।

 

गहलोत ने उस समय की घटना को याद करते हुए कहा:

"उस दौरान राम मंदिर ट्रस्ट के मिस्टर चंपत राय और दिनेश नाम के एक व्यक्ति मुझसे मिलने आए थे। मैंने उनसे साफ तौर पर कहा था कि आप राम मंदिर जैसा पवित्र काम करने जा रहे हैं, तो इसके लिए अवैध पत्थर मत ले जाइए। आप कानूनी रूप से (Legal Mining) खनन किया हुआ पत्थर ही इस्तेमाल करें।"

 

पीएमओ के हस्तक्षेप और राज्य सरकार की सिफारिश से सुलझा था मामला

गहलोत ने आगे बताया कि बंसी पहाड़पुर इलाके में अवैध खनन की बात जब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) तक पहुंची, तब पीएमओ से मिस्टर नृपेंद्र मिश्रा ने उनसे संपर्क किया। गहलोत ने उन्हें पूरी स्थिति से अवगत कराया।

चूंकि मामला भगवान राम के मंदिर से जुड़ा था, इसलिए राजस्थान की तत्कालीन गहलोत सरकार ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उस पूरे विवादित इलाके को फॉरेस्ट (वन क्षेत्र) की श्रेणी से बाहर निकलवाने की मजबूत सिफारिश केंद्र को भेजी। गहलोत ने कहा कि राम मंदिर का मामला होने के कारण यह काम बहुत आराम से और जल्दी हो गया, अन्यथा ऐसे मामलों में सालों लग जाते हैं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस सहयोग के लिए बाद में उन्हें धन्यवाद भी दिया गया था।

Similer Posts