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पूर्व सीएम अशोक गहलोत का बड़ा दावा, 'सरकार गिराने के लिए प्रत्येक विधायक को दिए गए थे 10-10 करोड़ के एडवांस'

 

जयपुर: राजस्थान की राजनीति का सबसे चर्चित 2020 का सियासी संकट एक बार फिर चर्चा में आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भाजपा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उस वक्त राजस्थान की कांग्रेस सरकार को गिराने के लिए हर एक विधायक के साथ 35 करोड़ रुपए का सौदा तय किया गया था, जिसके तहत कई लोगों को करोड़ों रुपए की एडवांस रकम भी सौंप दी गई थी। गहलोत ने गर्व जताते हुए कहा कि तमाम साजिशों के बावजूद वे राजस्थान की सरकार को बचाने में कामयाब रहे।

1. "10 करोड़ एडवांस दे दिए, जो आज तक वापस नहीं लिए"

अशोक गहलोत ने खरीद-फरोख्त के आंकड़ों का दावा करते हुए देश की मौजूदा राजनीतिक स्थिति पर चिंता जताई:

  • करोड़ों के सौदे का आरोप: गहलोत ने कहा, "सरकार गिराने के लिए राजस्थान सहित हर विधायक को 35 करोड़ रुपए के सौदे किए गए थे। लोगों को एडवांस तक दे दिए गए थे।"

  • रकम वापसी पर सवाल: उन्होंने आगे दावा किया कि साजिश के तहत विधायकों को 10-10 करोड़ रुपए एडवांस दिए गए थे, जो आज तक वापस नहीं लिए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि देश में इतना सब कुछ हो रहा है, लेकिन डर के मारे कोई इस पर मुंह खोलने को तैयार नहीं है।

2. मानेसर से धर्मेंद्र प्रधान के घर मीटिंग करने जाते थे विधायक; अमित शाह भी थे शामिल

पूर्व मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्रियों का नाम लेते हुए तत्कालीन घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ीं:

  • केंद्रीय मंत्रियों पर निशाना: गहलोत ने सीधे तौर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का नाम लेते हुए कहा कि इन नेताओं ने राजस्थान की सरकार गिराने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी।

  • नेताओं के घर होती थी बैठकें: उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय (मानेसर में बाड़ेबंदी के दौरान) कांग्रेस के बागी विधायक धर्मेंद्र प्रधान के घर पर बैठकें करने जाते थे और अमित शाह खुद वहां आकर उनसे मुलाकात करते थे। गहलोत ने कहा कि बीजेपी ने इतना बड़ा षड्यंत्र रचा था, जिसे हमने समय रहते एक्सपोज (बेनकाब) कर दिया।

3. डर के मारे पीछे हटी बीजेपी; खाली वापस भेजना पड़ा था हवाई जहाज

गहलोत ने दावा किया कि संकट के समय एक मोड़ ऐसा भी आया जब पासा पूरी तरह पलट गया और बीजेपी बैकफुट पर आ गई:

  • खाली लौटा विमान: उन्होंने कहा कि बीजेपी ने विधायकों को ले जाने के लिए दो विशेष हवाई जहाज भेजे थे, जिनमें से एक हवाई जहाज को खाली ही वापस लौटना पड़ा।

  • उल्टा दांव पड़ने का डर: पूर्व सीएम के अनुसार, तब बीजेपी नेतृत्व को समझ आ गया था कि कांग्रेस को तोड़ने के चक्कर में कहीं खुद भाजपा के ही विधायक न टूट जाएं। इसी डर के कारण वे कदम पीछे खींचने पर मजबूर हो गए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम को भी इसी हॉर्स ट्रेडिंग और डर के माहौल से जोड़कर देखा।

4. नेताओं को गहलोत की नसीहत— "दूसरों की लाइन काटने के बजाय अपनी लाइन बड़ी करो"

सियासी हमले के साथ-साथ अशोक गहलोत ने आज के दौर की राजनीति और नेताओं के काम करने के तौर-तरीकों पर भी गहरी निराशा जताई:

  • लाइन बड़ी करने का चलन खत्म: उन्होंने कहा कि राजनीति में आगे बढ़ने का सही तरीका खुद की लाइन को बड़ा करना है। लेकिन दुर्भाग्य से आज चलन यह हो गया है कि लोग दूसरों की लाइन काटकर खुद को बड़ा दिखाने की कोशिश करते हैं, जो अंत में फेल हो जाता है।

  • गरीबों और दलित बस्तियों में जाने की सलाह: गहलोत ने नेताओं को नसीहत देते हुए कहा, "दिन-रात एक करें, गांवों में जाएं, गरीबों और शेड्यूल कास्ट (SC) की बस्तियों में जाकर काम करें।" उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा कि जनता के बीच जाकर काम करने की जो कांग्रेस की पुरानी परंपरा थी, वह अब धीरे-धीरे खत्म हो गई है।

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