अशोक गहलोत ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव बहाल करने की मांग पूरी तरह जायज है और सरकार को इसे अनावश्यक रूप से लंबित नहीं रखना चाहिए:
दिग्गज नेताओं का उदाहरण: गहलोत ने कहा कि छात्र राजनीति लोकतंत्र की पहली पाठशाला होती है। दिवंगत केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली, भाजपा नेता राजेंद्र राठौड़, कांग्रेस के रघु शर्मा, महेश जोशी और वे स्वयं इसी छात्र राजनीति से निकलकर आगे बढ़े हैं।
नेतृत्व विकास का मंच: छात्रसंघ चुनाव युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने का बड़ा अवसर देते हैं, इसलिए इन्हें तुरंत शुरू किया जाना चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा:
सरकार की संवेदनहीनता: देश में हाल ही में हुए Gen-Z आंदोलन के बाद बनी परिस्थितियों के बावजूद राजस्थान सरकार छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं ले रही है।
स्वास्थ्य पर चिंता: 14 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर रहने के कारण छात्र नेता की तबीयत काफी बिगड़ गई है। इसी चिंताजनक स्थिति को देखते हुए उन्होंने अस्पताल में शुभम को जबरदस्ती पानी पिलाया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अशोक गहलोत ने सीधे मुख्यमंत्री से दखल देने की मांग की:
सीएम से हस्तक्षेप की मांग: गहलोत ने कहा कि इस मामले में मुख्यमंत्री को स्वयं हस्तक्षेप कर जल्द समाधान निकालना चाहिए।
प्रशासन से बात: इस संबंध में उन्होंने जयपुर जिला कलेक्टर से भी वार्ता की है और छात्रों की भावना से सरकार को अवगत कराया है।
अनशन खत्म करने की सलाह: गहलोत ने शुभम रेवाड़ से भी आग्रह किया कि यदि सरकार बुधवार शाम तक कोई फैसला नहीं लेती है, तब भी वे अपने स्वास्थ्य के हित में अनशन समाप्त करने पर विचार करें।