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सोनिया गांधी की किताब विवाद पर अशोक गहलोत का केंद्र पर निशाना: बोले–'अभिव्यक्ति की आजादी पर लगाया जा रहा बैन'

जयपुर: राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोनिया गांधी की आगामी पुस्तक के भारत में प्रकाशन को लेकर उपजे विवाद के बीच केंद्र सरकार पर जोरदार हमला बोला है। गहलोत ने केंद्र सरकार पर देश में अभिव्यक्ति की आजादी को दबाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राजनीतिक दबाव के कारण प्रकाशक पेंग्विन अब इस किताब को भारत में छापने से पीछे हट रहा है।

 

‘अंश हटाने को कहा गया, सोनिया गांधी ने साफ मना कर दिया’

अशोक गहलोत ने आरोप लगाया कि सोनिया गांधी की किताब को लेकर पेंग्विन रैंडम हाउस इंडिया ने कुछ हिस्सों को हटाने या संशोधित करने की बात कही थी:

  • सोनिया गांधी का इनकार: प्रकाशक पेंग्विन ने सोनिया गांधी से किताब के कुछ हिस्सों को हटाने का अनुरोध किया था, लेकिन सोनिया गांधी ने अपनी बात पर अडिग रहते हुए ऐसा करने से साफ इनकार कर दिया।

  • विवाद के संभावित मुद्दे: गहलोत के अनुसार, किताब में चीन सीमा विवाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और आरएसएस (RSS) को लेकर कुछ बेबाक टिप्पणियां हो सकती हैं। इसी कारण केंद्र सरकार या सत्ता से जुड़े लोगों को परेशानी हुई होगी।

  • लोकतंत्र पर सवाल: गहलोत ने सवाल उठाते हुए कहा, "फिर लोकतंत्र कहां रहा? अगर आप फ्रीडम ऑफ एक्सप्रेशन को ही बैन करना चाहते हैं, तो यह सीधे तौर पर संविधान की मूल भावना के खिलाफ है।"

 

"पूरी दुनिया में किताब छपेगी, भारत में नहीं; यह दुर्भाग्यपूर्ण"

पूर्व मुख्यमंत्री ने पूरे मामले को लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ और बहुत गलत परंपरा बताया:

  • वैश्विक प्रकाशन पर सवाल: गहलोत ने कहा कि राहुल गांधी बार-बार 'संविधान बचाओ' की बात इसीलिए करते हैं। उन्होंने पूछा कि ऐसा कौन सा दबाव है कि जो किताब पूरी दुनिया में छपने जा रही है, वह भारत में प्रकाशित नहीं हो सकती?

  • सोनिया गांधी के व्यक्तित्व की तारीफ: उन्होंने कहा कि आज चाहे पक्ष (सत्ता पक्ष) हो या विपक्ष, किसी से भी सोनिया गांधी के व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में बात करेंगे, तो इक्के-दुक्के लोगों को छोड़कर बाकी सभी उनके योगदान और त्याग की तारीफ ही करते हैं। ऐसे में उनकी किताब के साथ ऐसा कदम उठाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है।

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