जयपुर: लोकसभा में महिला आरक्षण (131वां संशोधन) विधेयक के पारित न हो पाने के विरोध में आज राजस्थान भारतीय जनता पार्टी ने राजधानी जयपुर में जोरदार प्रदर्शन किया। बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं ने 'जन आक्रोश पदयात्रा' निकालकर विपक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और इस ऐतिहासिक अवसर को रोकने का आरोप लगाया।
बीजेपी की यह पदयात्रा जब जयपुर पुलिस कमिश्नरेट के पास पहुंची, तो पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर प्रदर्शनकारियों को रोक दिया।
तीखा विरोध: पुलिस द्वारा रोके जाने पर महिला कार्यकर्ता आक्रोशित हो गईं। इसी दौरान महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सुमन शर्मा विरोध जताने के लिए पुलिस बैरिकेड्स के ऊपर चढ़ गईं, जिससे मौके पर काफी देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा।
पदयात्रा से पहले बीजेपी मुख्यालय में आयोजित सभा को मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने संबोधित किया।
ऐतिहासिक अवसर खोया: सीएम ने कहा, "17 अप्रैल का दिन भारत के इतिहास में एक स्वर्णिम और ऐतिहासिक दिन बनने वाला था, लेकिन विपक्ष के नकारात्मक रवैये ने इसे काला पन्ना बनाकर छोड़ दिया। देश की महिलाएं इस विश्वासघात को कभी नहीं भूलेंगी।"
रवाना की यात्रा: सभा के बाद मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने हरी झंडी दिखाकर पदयात्रा को शहीद स्मारक के लिए रवाना किया।
लोकसभा में पेश किए गए इस संविधान (131वां संशोधन) बिल का लक्ष्य देश के राजनीतिक ढांचे में बड़ा बदलाव लाना था।
क्या था प्रस्ताव: बिल में लोकसभा की सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रावधान था।
वोटों का समीकरण: सदन में बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े, जबकि विरोध में 230 सांसदों ने मतदान किया। संविधान संशोधन के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोटों की आवश्यकता थी, जिसके अभाव में यह महत्वपूर्ण बिल गिर गया।
डिप्टी सीएम दीया कुमारी ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी महिलाओं को उनका हक देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, लेकिन विपक्षी दलों ने महिला विरोधी चेहरा उजागर कर दिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी इस मुद्दे को लेकर जनता के बीच जाएगी और विपक्ष के 'असली चेहरे' को बेनकाब करेगी।
बीजेपी के इस प्रदर्शन को देखते हुए जयपुर के एमआई रोड और आसपास के इलाकों में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी। पदयात्रा के कारण शहर के मध्य हिस्से में घंटों तक जाम की स्थिति बनी रही। बीजेपी नेताओं का कहना है कि अब यह आंदोलन जिला स्तर पर ले जाया जाएगा ताकि हर महिला तक यह बात पहुंचे कि किसने उनका अधिकार छीना है।