राज्य सरकार की इस योजना के तहत पात्र बेरोजगार युवाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना पर सरकार का हर माह करीब 60 करोड़ रुपए खर्च होता है। हालांकि, कई जिलों में युवाओं को कई महीनों से भुगतान नहीं मिलने की शिकायतें सामने आ रही हैं, जिससे युवाओं में नाराजगी बढ़ रही है।
नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए कहा कि बेरोजगारी भत्ता केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि संघर्ष कर रहे युवाओं के सम्मान और भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से अपील की कि लंबित भुगतान तत्काल जारी किया जाए और आगे से समय पर भत्ता देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
बेनीवाल ने कहा कि सरकार को युवाओं को केवल आंकड़ों और घोषणाओं तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि रोजगार और आर्थिक सहारे के रूप में वास्तविक मदद प्रदान करनी चाहिए।
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से मिल रही जानकारी से ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार बेरोजगारी भत्ता योजना को भी अन्य योजनाओं की तरह धीरे-धीरे समाप्त करने की दिशा में बढ़ रही है।
गहलोत ने आरोप लगाया कि करीब 2 लाख युवा सात महीने से मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के तहत मिलने वाले 4,000 रुपए मासिक भत्ते का इंतजार कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि 17 जिलों में तो मार्च महीने तक की ही राशि युवाओं के खातों में पहुंच पाई है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह गारंटी दी थी कि कांग्रेस सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं बंद नहीं की जाएंगी। लेकिन वर्तमान स्थिति को देखते हुए ऐसा लगता है कि योजनाओं को औपचारिक रूप से बंद किए बिना भुगतान रोककर उन्हें कमजोर किया जा रहा है।
गहलोत ने इसे केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि बेरोजगार युवाओं के साथ खुला विश्वासघात बताया। उन्होंने कहा कि यदि सरकार प्रधानमंत्री की दी गई गारंटी तक पूरी नहीं कर पा रही है, तो बेरोजगारों के हितैषी होने का दावा कैसे कर सकती है। उन्होंने सभी बकाया भुगतान तुरंत जारी करने और भविष्य में समय पर राशि उपलब्ध कराने की मांग की।
राजस्थान सरकार की मुख्यमंत्री युवा संबल योजना के तहत पात्र बेरोजगार युवाओं को आर्थिक सहायता दी जाती है। योजना के अनुसार सामान्य बेरोजगार युवाओं को 4,000 रुपए प्रतिमाह, जबकि महिलाओं, ट्रांसजेंडर और दिव्यांग लाभार्थियों को 4,500 रुपए प्रतिमाह भत्ता देने का प्रावधान है।
यह सहायता अधिकतम दो वर्ष या लाभार्थी को रोजगार मिलने तक दी जाती है। योजना के तहत राज्य में अधिकतम 2 लाख युवाओं को लाभ देने का प्रावधान है।
बेरोजगारी भत्ते को लेकर उठे इस विवाद के बीच अब युवाओं की नजर राज्य सरकार की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है। यदि भुगतान में देरी के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मुद्दा आगामी राजनीतिक और सामाजिक बहस का बड़ा विषय बन सकता है।