प्रदर्शनकारियों की बढ़ती भीड़ और विधानसभा कूच के ऐलान को देखते हुए जयपुर पुलिस-प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड़ पर है:
कड़ी सुरक्षा व्यवस्था: शहीद स्मारक और आसपास के संवेदनशील इलाकों में पुलिस का भारी जाब्ता तैनात किया गया है।
बैरिकेडिंग और निगरानी: शहीद स्मारक के बाहर मजबूत बैरिकेड्स लगाए गए हैं। साथ ही कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पूरे क्षेत्र की ड्रोन कैमरों से लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है।
प्रदर्शन के दौरान भीड़ को संबोधित करते हुए भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद ने न्यायिक और जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए:
गहरे जख्म की टीस: चंद्रशेखर ने कहा कि डांगावास जैसी घटनाएं समाज पर गहरे जख्म छोड़ जाती हैं। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी (CBI) भी इस मामले में पुख्ता सबूत नहीं जुटा सकी।
सरकारी वकीलों पर सवाल: उन्होंने कहा कि डांगावास जैसी बर्बरता दोबारा न हो, इसके लिए सामंतवादी सोच को उखाड़ फेंकना होगा। उन्होंने आरोप लगाया कि यदि सरकार बेहतर वकील खड़े करती, तो दलित परिवारों को न्याय जरूर मिलता।
चंद्रशेखर आजाद ने मामले में न्याय न मिलने पर आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का संकेत दिया:
जयपुर से डांगावास पदयात्रा: उन्होंने घोषणा की कि वे समाज के साथ मिलकर जयपुर से डांगावास तक पैदल यात्रा निकालेंगे।
संसद में नहीं चल सका सदन: उन्होंने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे इस मुद्दे को संसद में उठाना चाहते थे, लेकिन सदन की कार्यवाही न चलने के कारण बात नहीं रख पाए। अगर आरोपियों ने हत्या नहीं की तो क्या पीड़ित परिवारों को धरती निगल गई या आसमान?
नागौर जिले के डांगावास गांव में 14 मई 2015 को 23 बीघा जमीन के विवाद को लेकर खूनी संघर्ष हुआ था:
5 दलितों समेत 6 की मौत: इस हिंसा में रतनाराम मेघवाल, पोखरराम मेघवाल, पांचाराम मेघवाल, खेमाराम मेघवाल और गणपतराम मेघवाल की मौत हो गई थी, जबकि दूसरे पक्ष के रामपाल की भी जान चली गई थी।
ट्रैक्टर से कुचलने का आरोप: घटना के दौरान पीड़ितों को ट्रैक्टर से कुचलने और बर्बरता करने के गंभीर आरोप लगे थे।
CBI जांच के बाद बरी: मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई थी, लेकिन गवाहों के बयानों और ठोस साक्ष्यों के अभाव के चलते हाल ही में एससी/एसटी मामलों की विशेष अदालत ने सभी 40 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।