यह आदेश मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया, जिसमें भोजशाला परिसर को मां सरस्वती का मंदिर माना गया था और वहां नमाज की अनुमति समाप्त कर दी गई थी।
मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं पर नोटिस जारी करते हुए सभी पक्षों से जवाब मांगा है। हालांकि, अदालत ने फिलहाल हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगाने या पहले जैसी व्यवस्था बहाल करने से इनकार कर दिया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि मामले की अंतिम सुनवाई बाद में की जाएगी। तब तक यथास्थिति बनाए रखने के साथ-साथ धार्मिक भावनाओं और कानून-व्यवस्था के संतुलन को ध्यान में रखते हुए अंतरिम व्यवस्था लागू रहेगी।
मुस्लिम पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजैफा अहमदी ने अदालत से आग्रह किया कि ASI को परिसर में किसी भी प्रकार के निर्माण या संरचनात्मक परिवर्तन से रोका जाए। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि अदालत की अनुमति के बिना भोजशाला परिसर में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
वहीं, भोजशाला मुक्ति यज्ञ समिति के संयोजक गोपाल शर्मा ने सुनवाई के बाद कहा कि मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार भोजशाला में नियमित पूजा-अर्चना पूर्ववत जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार मुस्लिम समुदाय को निर्धारित वैकल्पिक स्थान पर नमाज अदा करने की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
धार की भोजशाला लंबे समय से धार्मिक और कानूनी विवाद का केंद्र रही है। हिंदू पक्ष इसे मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद से जुड़ा धार्मिक स्थल बताता है। इसी विवाद को लेकर वर्षों से विभिन्न अदालतों में सुनवाई चल रही है।
अब सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर विस्तृत जवाब मांगा है और संकेत दिया है कि मामले की अंतिम सुनवाई आगामी सप्ताहों में की जाएगी। तब तक ASI परिसर में कोई संरचनात्मक बदलाव नहीं कर सकेगा और राज्य सरकार को शुक्रवार की नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने की व्यवस्था करनी होगी।