सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक आदेश और केंद्र सरकार से मिले आश्वासन के बाद CJP ने आगामी 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित अपना बड़ा विरोध मार्च वापस लेने की घोषणा कर दी है।
यह फैसला दिल्ली पुलिस द्वारा दाखिल किए गए एक अंतरिम आवेदन (Interim Application) पर सुनवाई के दौरान सुनाया गया:
मामले खत्म करने की मांग: सरकार और दिल्ली पुलिस ने अदालत में कहा कि वे 25 जुलाई के अदालती आदेश के बाद CJP के प्रदर्शनों से जुड़ी 13 एफआईआर को आगे नहीं बढ़ाना चाहते हैं और इन्हें समाप्त करना चाहते हैं।
अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल: शीर्ष अदालत ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का प्रयोग करते हुए FIR रद्द करने का आदेश दिया।
नजीर नहीं बनेगा फैसला: पीठ ने स्पष्ट किया कि यह फैसला केवल इस मामले की विशेष परिस्थितियों को देखकर लिया गया है, इसलिए इसे भविष्य के अन्य मामलों में नजीर (उदाहरण) के रूप में पेश नहीं किया जा सकेगा।
अदालत के फैसले पर कॉकरोच जनता पार्टी के प्रतिनिधियों ने खुशी जताते हुए इसे निष्पक्ष न्याय की जीत बताया है:
विश्वासघात का था अंदेशा: CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि अगस्त की शुरुआत में सरकार ने बातचीत बंद कर दी थी, जिससे विश्वासघात की आशंका के चलते 5 सितंबर को मार्च का ऐलान किया गया था। लेकिन अब देशभर में FIR रद्द होना एक ऐतिहासिक पल है।
छात्रों को राहत: संगठन के प्रतिनिधि अभिजीत दीपके और CJP ने बयान जारी कर कहा, "अदालत ने छात्रों के खिलाफ चल रहे सभी अन्यायपूर्ण मुकदमों को खारिज कर दिया है। हमारी मांगें सुन ली गई हैं। इंकलाब जिंदाबाद।"