जयपुर: राजस्थान विधानसभा के मानसून सत्र के पहले ही दिन राज्य की राजनीति में भूचाल आ गया। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में मीडिया और बाहरी लोगों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाए जाने के फैसले के विरोध में कांग्रेस विधायकों ने विधानसभा के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन और धरना दिया। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने राज्य सरकार पर 'तानाशाही' का आरोप लगाते हुए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग की।
विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही कांग्रेस विधायकों ने आक्रामक रुख अपना लिया:
पोद्दार स्कूल का दौरा: सुबह कांग्रेस विधायक सबसे पहले जयपुर स्थित पोद्दार मूक-बधिर स्कूल पहुंचे, जहां उन्हें प्रवेश करने से रोक दिया गया।
विधानसभा तक मार्च: इसके विरोध में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में विधायकों ने पोद्दार स्कूल से विधानसभा तक पैदल मार्च निकाला।
पुलिस से धक्का-मुक्की: जब विधायक विधानसभा परिसर में प्रवेश करने लगे तो पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और विधायकों के बीच तीखी बहस व धक्का-मुक्की हुई, जिसमें कई नेता बैरिकेड्स पर चढ़कर नारेबाजी करने लगे।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व टोंक विधायक सचिन पायलट ने सरकार के आदेश पर सवाल उठाते हुए तीखा प्रहार किया:
सच्चाई छिपाने का आरोप: सचिन पायलट ने कहा कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए ऐसे कानून ला रही है। पत्रकार स्कूलों में नहीं जा सकते, फोटो या वीडियोग्राफी नहीं कर सकते।
जर्जर भवनों पर चिंता: पायलट ने आरोप लगाया कि राज्य में स्कूलों की स्थिति अत्यंत दयनीय है। जर्जर भवनों और लापरवाही के कारण झालावाड़ में बच्चों की जान तक चली गई। जनता से सच छिपाने का यह फरमान पूरी तरह अस्वीकार्य है और शिक्षा मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने विधानसभा के बाहर धरने को संबोधित करते हुए सरकार पर आंकड़े जारी कर निशाना साधा:
विशेषाधिकार हनन का नोटिस: जूली ने कहा कि विधायकों को विधानसभा के मुख्य गेट से जाने से रोका गया, जो लोकतांत्रिक मर्यादाओं के खिलाफ है। इसके खिलाफ विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिया जाएगा।
जर्जर स्कूलों के आंकड़े: जूली ने दावा किया कि प्रदेश में 3,768 स्कूल पूरी तरह जर्जर घोषित हैं, लेकिन एक का भी पुनर्निर्माण नहीं हुआ। 85 हजार से अधिक कक्षाओं के कमरे जर्जर हैं, सवा लाख शिक्षकों के पद खाली पड़े हैं और पिछले 3 वर्षों में 9 लाख बच्चे स्कूल छोड़ चुके हैं। पिपलोदी हादसे का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि 7 मासूमों की मौत के बाद भी वह स्कूल आज तक नहीं बन सका है।
मानसून सत्र के पहले दिन सदन में भी गहमागहमी का माहौल रहा:
सदन की कार्यवाही स्थगित: सुबह 11 बजे विधानसभा की कार्यवाही शुरू हुई। दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि देने के बाद सुबह 11:22 बजे अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही शुक्रवार सुबह तक के लिए स्थगित कर दी। इसके बाद कांग्रेस विधायकों ने अपना धरना समाप्त किया।
BAP का प्रदर्शन: दूसरी ओर, भारत आदिवासी पार्टी (BAP) के विधायकों ने मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक का दर्जा देने की पुरानी मांग को लेकर विधानसभा के बाहर अपना अलग प्रदर्शन किया।