कोटा: शिक्षा नगरी कोटा में 80 फीट रोड पर बन रहे भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नए जिला कार्यालय को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। पश्चिम मध्य रेलवे (WCR) ने करीब 3 हजार वर्गमीटर भूमि पर हो रहे इस भव्य निर्माण को रेलवे की स्वामित्व वाली जमीन पर 'अवैध निर्माण' करार दिया है।
रेलवे प्रशासन ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए वरिष्ठ मंडल अभियंता (दक्षिण) की ओर से सहायक मंडल अभियंता (रामगंजमंडी) को पत्र लिखकर तुरंत कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए हैं। इसके साथ ही कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) को भी इस संबंध में आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है।
रेलवे रिकॉर्ड के अनुसार, यह विवादित जमीन 10 जुलाई 2008 को तत्कालीन यूआईटी (UIT, जो अब कोटा विकास प्राधिकरण यानी KDA है) को 35 साल की लीज पर सौंपी गई थी। इस लीज का एकमात्र उद्देश्य सार्वजनिक हित में केवल 'सड़क निर्माण' करना था। लीज डीड की शर्तों में यह पूरी तरह स्पष्ट किया गया था कि इस जमीन का व्यावसायिक, राजनीतिक या अन्य किसी भी प्रकार का उपयोग नहीं किया जा सकता।
इसके बावजूद, साल 2020 में यूआईटी ने लीज की शर्तों के विपरीत जाते हुए इसी जमीन का आवंटन भाजपा को कार्यालय निर्माण के लिए कर दिया, जिस पर वर्तमान में निर्माण कार्य चल रहा है।
इस मामले में जमीन की वास्तविक चौड़ाई को लेकर भी एक बड़ा तकनीकी विवाद सामने आया है:
रेलवे का दावा: रेलवे के पास उपलब्ध साल 1965 के संयुक्त लैंड प्लान के अनुसार, संबंधित रेल लाइन के किलोमीटर 910/10 से 914/00 के बीच रेलवे की जमीन की कुल चौड़ाई 182.88 मीटर दर्ज है। इसी आधार पर अप्रैल में रेलवे के एसएसई (परमानेंट-वे साउथ) ने उच्च अधिकारियों को अवैध निर्माण की रिपोर्ट भेजी थी।
राजस्व विभाग का पक्ष: विवाद बढ़ने पर 14 मई को रेलवे, केडीए और राजस्व विभाग ने एक संयुक्त सर्वे किया। इस सर्वे में राजस्व विभाग ने साल 1982 के रिकॉर्ड का हवाला देते हुए मौके पर रेलवे की जमीन की चौड़ाई केवल 72 मीटर बताई। दोनों विभागों के रिकॉर्ड में आ रहे इस बड़े अंतर के कारण मामला और पेचीदा हो गया है।
सहायक मंडल अभियंता (रामगंजमंडी, पश्चिम मध्य रेलवे) पुंडरिक चंद्र ने इस मामले पर रेलवे का रुख स्पष्ट करते हुए कहा कि यह जमीन केवल जनहित में सड़क बनाने के लिए आवंटित की गई थी। वर्तमान में वहां हो रहा निर्माण लीज की मूल शर्तों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि कोटा विकास प्राधिकरण (KDA) की यह कानूनी और नैतिक जवाबदेही बनती है कि वह जमीन का उपयोग उसी निर्धारित उद्देश्य के लिए सुनिश्चित करे जिसके लिए उसे लीज दी गई थी। इस संबंध में केडीए को आधिकारिक पत्र भेजकर अवगत करा दिया गया है।
दूसरी तरफ, इस पूरे विवाद पर भाजपा ने अपना पक्ष रखते हुए किसी भी तरह के अवैध निर्माण से इनकार किया है। भाजपा शहर जिलाध्यक्ष राकेश जैन ने कहा:
"पार्टी ने इस जमीन के आवंटन के लिए नियमानुसार पूरा भुगतान किया है और केडीए (तत्कालीन यूआईटी) ने विधिवत तरीके से यह जमीन हमें आवंटित की है। यदि रेलवे का कोई दावा या आपत्ति है, तो यह पूरी तरह से रेलवे और केडीए के बीच का आंतरिक विषय है। इस पूरे क्षेत्र में पहले से ही कई निर्माण हो चुके हैं, यहाँ तक कि बस स्टैंड भी बना हुआ है। समझ नहीं आता कि अचानक रेलवे की जमीन यहाँ कहाँ से आ गई; सिर्फ हमारा ऑफिस ही थोड़ी बन रहा है।"