देश में पिछले कुछ दिनों से E20 पेट्रोल को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। आम लोगों से लेकर विपक्षी दलों तक, कई पक्ष सरकार से इस नीति पर सवाल पूछ रहे हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे कई वीडियो और दावे वायरल हुए हैं, जिनमें वाहन मालिकों ने आरोप लगाया है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से उनकी गाड़ियों के इंजन में खराबी आ रही है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और सरकार का कहना है कि E20 ईंधन निर्धारित मानकों के अनुसार तैयार किया गया है तथा E20-अनुकूल (E20 compliant) वाहनों के लिए सुरक्षित है।
इसी मुद्दे को लेकर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक वीडियो साझा करते हुए लिखा, "E20 - दाल में काला नहीं, पूरी दाल ही काली है।" वीडियो में राहुल गांधी कहते हैं कि E20 का मामला बेहद गंभीर है। उनका आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में भारी भ्रष्टाचार हुआ है और इसकी वजह से लोगों की कारें, स्कूटर और अन्य वाहन प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल तकनीकी समस्या नहीं, बल्कि आम लोगों के साथ "चोरी" है और कांग्रेस इस मुद्दे को जोर-शोर से उठाएगी।
राहुल गांधी ने अपने बयान में यह भी कहा कि E20 पेट्रोल से वाहन मालिकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है और सरकार को इस पर जवाब देना चाहिए। उनका दावा है कि यदि लोगों की गाड़ियां प्रभावित हो रही हैं तो इसकी जवाबदेही तय होनी चाहिए। विपक्ष लगातार मांग कर रहा है कि सरकार E20 नीति और इससे जुड़े तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत स्पष्टीकरण दे।
वहीं, राहुल गांधी के आरोपों पर भारतीय जनता पार्टी ने भी पलटवार किया है। भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने राहुल गांधी के बयान को भ्रामक बताते हुए कहा कि वह तथ्यों के बजाय राजनीति कर रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जिस वाहन को राहुल गांधी अपने वीडियो में दिखा रहे हैं, उसके बारे में उनकी जानकारी ही गलत है। भंडारी ने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी की "एक्टिंग भी ठीक नहीं होती" और ऐसे आधारहीन आरोप लगाकर जनता को गुमराह करने की कोशिश की जा रही है।
E20 पेट्रोल को लेकर जारी यह बहस अब राजनीतिक रंग भी ले चुकी है। एक ओर विपक्ष इंजन खराब होने की शिकायतों और कथित भ्रष्टाचार के आरोपों के आधार पर सरकार को घेर रहा है, तो दूसरी ओर सरकार और भाजपा का कहना है कि E20 कार्यक्रम देश की ऊर्जा सुरक्षा, पेट्रोलियम आयात में कमी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। ऐसे में इस मुद्दे पर आगे सरकार की प्रतिक्रिया और तकनीकी जांच की रिपोर्ट पर सभी की नजर बनी हुई है।