अंबेडकर चौक से शुरू हुआ यह पैदल मार्च जब झुंझुनूं कलेक्ट्रेट पहुंचा, तो तेज धूप के कारण हालात बेकाबू हो चुके थे:
सड़क पर गिरे गुढ़ा: लंबी दूरी तय करने और पसीने से तरबतर होने के कारण राजेंद्र गुढ़ा कलेक्ट्रेट के बाहर ही निढाल होकर सड़क पर लेट गए।
अस्पताल जाने से इनकार: समर्थकों और स्थानीय लोगों ने तुरंत उनके चेहरे पर पानी छिड़का और तौलिये व हाथ के पंखों से हवा डालनी शुरू की। हालांकि, तबीयत बिगड़ने के बावजूद गुढ़ा ने हॉस्पिटल जाने से साफ मना कर दिया।
प्रशासन पर आरोप: होश में आने पर गुढ़ा ने कहा, "प्रशासन ने हमें यहां टेंट तक नहीं लगाने दिया। हमारे पास बैठने के लिए छाया भी नहीं है। मैं ऐसा स्वार्थी नहीं हो सकता कि मेरे सारे भाई 45 डिग्री तापमान में धूप में बैठे रहें और मैं अकेला छांव में जाकर बैठ जाऊं।"
पैदल मार्च के दौरान पूर्व मंत्री राजेंद्र गुढ़ा का एक बेहद भावुक और कड़ा बयान भी सामने आया, जिसने इस आंदोलन को एक नई राजनीतिक हवा दे दी है:
सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल: मार्च के दौरान गुढ़ा ने एक स्थानीय युवक का हाथ पकड़कर जनता से कहा, "ये कर्मा भाई हैं। ये मुसलमान राजपूत हैं और मैं हिंदू राजपूत हूं। हम दोनों पीढ़ियों से यहां भाई-भाई की तरह रह रहे हैं। शेखावाटी के इतिहास में राव शेखा के हर युद्ध में मुसलमान भाइयों ने उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई लड़ी थी और सूफी संत शेख बुरहान हमारे आराध्य हैं।"
बड़ी चेतावनी: उन्होंने तीखे लहजे में कहा कि आज ये लोग राजनीति के तहत एक गांव का नाम बदल रहे हैं, कल ये पूरे शेखावाटी का नाम भी बदलेंगे। लेकिन हम ऐसा होने नहीं देंगे; अगर गांव का नाम बदला गया तो हम उनका नाम बदल देंगे।
इस पूरे विवाद की शुरुआत स्थानीय विधायक के एक पत्र के बाद हुई, जिसने अब एक बड़े आंदोलन का रूप ले लिया है:
विधायक का प्रस्ताव: दरअसल, झुंझुनूं के स्थानीय विधायक राजेंद्र भांबू ने ऐतिहासिक 'इस्लामपुर' गांव का नाम बदलकर उसे 'श्रीरामपुर' करने के प्रस्ताव पर अपनी सहमति जताई थी और इस संबंध में मुख्यमंत्री को एक सिफारिशी पत्र भेजा था।
CMO का एक्शन और विरोध: मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) ने इस पत्र पर संज्ञान लेते हुए झुंझुनूं कलेक्टर को पूरे मामले की ग्राउंड रिपोर्ट और फीडबैक भेजने के निर्देश जारी किए। जैसे ही जिला प्रशासन के स्तर पर इस फाइल की कागजी और प्रशासनिक कार्रवाई शुरू हुई, गांव के लोगों को इसकी भनक लग गई और नाम बदलने के विरोध में यह बड़ा आंदोलन खड़ा हो गया।