जयपुर: पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत द्वारा हाल ही में विधायकों की खरीद-फरोख्त और अपनी ही पार्टी के नेताओं को लेकर दिए गए बयानों पर सोमवार को भाजपा के बड़े नेताओं ने तीखी प्रतिक्रिया दी। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत सहित प्रदेश भाजपा के शीर्ष नेताओं ने दावा किया कि गहलोत आज के दौर में खुद को प्रासंगिक (रिलेवेंट) बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं और इसी डर के कारण वे लगातार बयानबाजी कर रहे हैं।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने गहलोत के बयानों को उनकी राजनीतिक छटपटाहट करार दिया:
पद छिनने का डर: शेखावत ने कहा कि कांग्रेस के भीतर सचिन पायलट को कोई नई और बड़ी जिम्मेदारी देने की चर्चाएं चल रही हैं। ऐसे समय में गहलोत का छटपटाना स्वाभाविक है और वे हमेशा ऐसे मौकों पर 'बोतल से जिन्न' बाहर निकाल लाते हैं।
खुद को रिलेवेंट बनाए रखने का संघर्ष: उन्होंने आरोप लगाया कि गहलोत पिछले 40 सालों से राजस्थान की राजनीति में कांग्रेस की धुरी बने बैठे थे, लेकिन अब उन्हें इस धुरी से नीचे उतरने का डर सता रहा है। आज वे खुद को प्रासंगिक बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
शेखावत ने गहलोत द्वारा दी गई 'लाइन बड़ी करने' और 'गरीब बस्तियों में जाने' की नसीहत पर भी करारा जवाब दिया:
इतिहास गवाह है: केंद्रीय मंत्री ने कहा, "गहलोत ने मुझसे कहा कि मुझे राजनीतिक रूप से अपनी लाइन लंबी करनी चाहिए। लेकिन राजस्थान में कांग्रेस का इतिहास इस बात का गवाह है कि जिस भी कार्यकर्ता ने अपनी लाइन को थोड़ा भी लंबा करने की कोशिश की, गहलोत ने खुद रबर लेकर उसे मिटाने का काम किया है।"
वीर दुर्गादास की परंपरा: गहलोत द्वारा खुद को डरा हुआ बताए जाने पर शेखावत ने पलटवार किया, "मैं वीर दुर्गादास राठौड़ की परंपरा का अनुयायी हूँ, डर मेरे खून में नहीं है। सच तो यह है कि मैं न होता तो आपकी राजनीति ही खत्म हो जानी थी। मैं आपकी तरह किसी एक परिवार का सेवक नहीं हूँ और आपका पूरा जीवन पदलोलुपता का प्रमाण रहा है।"
भाजपा के वरिष्ठ नेता सतीश पूनिया ने भी पूर्व मुख्यमंत्री की कार्यशैली और छवि पर तीखा हमला बोला:
गांधी परिवार को खुश करने की राजनीति: सतीश पूनिया ने गहलोत पर निशाना साधते हुए कहा कि उनकी छवि हमेशा से एक तरह के तिकड़मबाज, एडजस्टमेंट और मैनेजमेंट करने वाले नेता की रही है।
उन्होंने आगे कहा कि गहलोत का पूरा ध्यान केवल दिल्ली में बैठे नेहरू-गांधी खानदान को खुश रखने पर केंद्रित रहता है।
पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ ने अशोक गहलोत की राजनीतिक चतुराई पर तंज कसा:
राजनीति से प्रेरित बयान: राजेंद्र राठौड़ ने कहा कि अशोक गहलोत एक ऐसे मंझे हुए राजनेता हैं, जो अगर सामान्य रूप से सांस भी लेते हैं, तो उसके पीछे भी कोई न कोई गहरी राजनीति और उनका अपना व्यक्तिगत एजेंडा छिपा रहता है। सोमवार को आए उनके बयानों के पीछे भी आगामी राजनीतिक बिसात ही है।