केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने मंगलवार को गहलोत के बयान पर पलटवार करते हुए कहा— "अशोक गहलोत कांग्रेस पार्टी को मानेसर की घटना भूलने नहीं देना चाहते। मैंने तब भी कहा था और आज फिर कहता हूं कि उस पूरी घटना के रचनाकार, कहानी के रचयिता और उस ड्रामे के डायरेक्टर खुद गहलोत साहब थे।" ### 2. सचिन पायलट को बताया 'राजनीतिक मोहरा' शेखावत ने सचिन पायलट का पक्ष लेते हुए गहलोत की मंशा पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा— "सचिन पायलट तो वहां मात्र एक मोहरा थे। गहलोत साहब आज भी उस मोहरे का इस्तेमाल केवल इसलिए कर रहे हैं ताकि उनका अपना राजनीतिक वनवास समाप्त हो सके। वे इस तरह की बयानबाजी आगे भी करते रहेंगे।"
इस ताज़ा सियासी घमासान की शुरुआत बीजेपी के प्रदेश प्रभारी राधा मोहन दास अग्रवाल के बयान से हुई थी। उन्होंने टोंक में पायलट पर तंज कसते हुए कहा था कि— "पायलट की एक टांग कांग्रेस में रहती है और दूसरी टांग का पता नहीं कहाँ रहती है।" इस बयान ने कांग्रेस और बीजेपी के बीच पुरानी रंजिश को फिर से हवा दे दी।
बीजेपी प्रभारी को जवाब देते हुए अशोक गहलोत ने सोमवार को कहा था कि पायलट की दोनों टांगें कांग्रेस में ही रहेंगी। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ दिया था कि— "पायलट को अनुभव हो गया है कि ऐसी गलती (बगावत) करने के क्या अंजाम होते हैं। अब वे समझ भी गए हैं और संभल भी गए हैं।" गहलोत के इसी 'गलती और अंजाम' वाले बयान को शेखावत ने आड़े हाथों लिया है।
जुलाई 2020 में सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायकों की हरियाणा के मानेसर में बाड़ेबंदी ने गहलोत सरकार को संकट में डाल दिया था।
पुरानी बहस: गहलोत इस घटना को अक्सर बीजेपी की 'सरकार गिराने की साजिश' बताते हैं।
नया मोड़: शेखावत के ताजा बयान ने अब यह बहस छेड़ दी है कि क्या वह बगावत वाकई पायलट की थी या गहलोत की किसी बड़ी सियासी बिसात का हिस्सा।