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"हल्दीघाटी के युद्ध में नहीं हारे थे महाराणा प्रताप; आबादी बढ़ने दो, भारत को डर नहीं": उदयपुर में बोले राज्यपाल हरिभाऊ बागडे

 

उदयपुर। राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने हल्दीघाटी के युद्ध और देश की बढ़ती जनसंख्या को लेकर बड़ा बयान दिया है। उदयपुर स्थित राजस्थान कृषि महाविद्यालय (RCA) में आयोजित उत्तर-पश्चिम क्षेत्रीय सम्मेलन 'एग्रीविजन' को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि चाटुकार इतिहासकारों ने इतिहास को गलत तरीके से पेश किया। इसके साथ ही उन्होंने भारत की बढ़ती आबादी पर भी बेबाक राय व्यक्त की।

"इतिहासकारों ने फैलाया झूठ, महाराणा प्रताप ने मुगलों को जमकर पीटा"

राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने मेवाड़ के गौरवशाली इतिहास का जिक्र करते हुए हल्दीघाटी युद्ध पर बड़ा दावा किया:

  • चाटुकार इतिहासकारों पर निशाना: राज्यपाल ने कहा कि हमारे देश के चाटुकार इतिहासकारों ने यह लिख दिया कि महाराणा प्रताप हल्दीघाटी की लड़ाई हार गए थे। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर महाराणा प्रताप हारते तो क्या वे अकबर को हर महीने चंदा या टैक्स देते? ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ।

  • मुगलों को खदेड़ा: उन्होंने कहा कि महाराणा प्रताप कभी युद्ध नहीं हारे, बल्कि वे जीते थे। उन्होंने देश और समाज के लिए महान कार्य किया और मुगलों को जमकर पीटा।

बीकानेर की किरण देवी का सुनाया किस्सा, अकबर के माफी मांगने का दावा

राज्यपाल ने अपने संबोधन के दौरान बीकानेर की महान वीरांगना किरण देवी के शौर्य का किस्सा भी साझा किया:

  • मीना बाजार की घटना: उन्होंने बताया कि जब मुगल बादशाह अकबर ने मीना बाजार में छद्मवेश धारण कर किरण देवी पर हाथ डालने का प्रयास किया था, तब किरण देवी ने अदम्य साहस दिखाते हुए अकबर को पटक दिया था।

  • छाती पर रख दिया था खंजर: किरण देवी ने अकबर की छाती पर खंजर रख दिया था, जिसके बाद अकबर ने अपने कान पकड़कर उनसे माफी मांगी थी।

"आबादी बढ़ रही है तो बढ़ने दो, भारत को नहीं लगता जनसंख्या का भार"

देश की बढ़ती जनसंख्या पर बोलते हुए राज्यपाल बागडे ने कहा कि भारत को आबादी से घबराने की आवश्यकता नहीं है:

  • बढ़ती आबादी पर राय: उन्होंने कहा कि भारत में प्रतिदिन आबादी बढ़ रही है, लेकिन इसके लिए हम जिम्मेदार नहीं हैं। अगर आबादी बढ़ रही है तो बढ़ने दो, हमारे देश को कभी जनसंख्या का भार नहीं महसूस होता।

  • चीन का दिया उदाहरण: चीन पर तंज कसते हुए राज्यपाल ने कहा कि चीन ने घबराकर शादी करने और बच्चे पैदा करने के लिए सरकारी अनुमति का नियम बना दिया था। हालांकि, जब भारत आबादी के मामले में उससे आगे निकल गया, तो चीन को भी अपना वह नियम वापस लेना पड़ा।

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