राज्यपाल ने राजस्थान के राजनीतिक इतिहास का जिक्र करते हुए नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की तरफ इशारा किया और मुस्कुराते हुए कहा:
उम्र पर खिंचाई: "जब मैंने पहली बार सुना कि राजस्थान के पहले निर्वाचित मुख्यमंत्री टीकाराम (पालीवाल) थे, तो मुझे लगा कि ये (टीकाराम जूली) तो नहीं होंगे, क्योंकि इनकी उम्र तो अभी बहुत कम है।"
नंबर कब आएगा?: उन्होंने आगे कहा, "टीकाराम पालीवाल जी यहां मुख्यमंत्री होकर गए, अब ये दूसरे टीकाराम मुख्यमंत्री होंगे या नहीं, मुझे मालूम नहीं है। आगे तो बहुत लंबी कतार (नंबर) है, इनका नंबर कब आएगा? वैसे ये मुख्यमंत्री होने वाले होंगे, ऐसा भी नहीं लगता।"
महाराष्ट्र की राजनीति का उदाहरण देते हुए राज्यपाल बागड़े ने विपक्ष की स्थिरता पर भी तंज कसा।
महाराष्ट्र का किस्सा: "प्रतिपक्ष का भी आज के दौर में कोई भरोसा नहीं रहता। जब मैं महाराष्ट्र विधानसभा का अध्यक्ष था, तब वहां दो प्रतिपक्ष के नेता अचानक इस्तीफा देकर सत्ताधारी दल में शामिल हो गए और मंत्री बन गए।"
जूली पर सफाई: इस टिप्पणी पर जब सदन में ठहाके गूंजने लगे, तो राज्यपाल ने हंसते हुए सफाई दी, "भाई, मैं टीकाराम जूली जी के बारे में नहीं बोल रहा हूं, मैं तो महाराष्ट्र की बात कर रहा हूं।"
अपने पुराने दिनों को याद करते हुए राज्यपाल ने बताया कि जब वे महाराष्ट्र के स्पीकर बने और अपने गांव लौटे, तो उनके दोस्तों ने उनसे पूछा कि स्पीकर का सबसे महत्वपूर्ण काम क्या होता है? राज्यपाल ने मजाकिया लहजे में जवाब दिया, "मैंने अपने दोस्तों से कहा कि स्पीकर का सबसे बड़ा काम यही होता है कि खुद चेयर पर बैठो और बाकी सभी माननीय विधायकों को नीचे बैठाकर शांत रखो। अब राजस्थान का तो मुझे मालूम नहीं कि यहां क्या स्थिति रहती है।"