जयपुर: राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने फिजियोथेरेपिस्टों का आह्वान किया है कि वे आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ भारत की प्राचीन चिकित्सा पद्धति की जड़ों को पहचानने का प्रयास करें। उन्होंने जोर देकर कहा कि चिकित्सा को केवल उपचार तक सीमित न रखें, बल्कि इसे सेवा और साधना का माध्यम बनाएं। श्री देवनानी गुरुवार को जयपुर के बिरला सभागार में “राजस्थान फ़िजियो समिट-2026” के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे।
दो दिवसीय इस नेशनल सेमिनार का आयोजन “फ़िजियोथेरेपी से फ़िजियोपैथी” विषय पर किया जा रहा है।
देशव्यापी भागीदारी: इस समिट में देश भर के 30 प्रमुख विश्वविद्यालयों के 2000 से अधिक छात्र, शोधकर्ता और विशेषज्ञ भाग ले रहे हैं।
नया दृष्टिकोण: विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि यह समिट उस परिवर्तन का प्रतीक है, जहाँ चिकित्सा केवल शरीर के उपचार तक सीमित नहीं रह जाती, बल्कि मनुष्य के सम्पूर्ण अस्तित्व को समझने की दिशा में आगे बढ़ती है।
देवनानी ने अपने संबोधन में कहा कि आज की दुनिया जिसे 'न्यूरो रिहैबिलिटेशन' या 'माइंड-बॉडी कनेक्शन' कह रही है, उसका वर्णन हमारे ऋषियों ने हजारों वर्ष पहले ही कर दिया था।
प्राचीन अवधारणाएं: हमारे शास्त्रों में वर्णित प्राण, नाड़ी, चक्र और ऊर्जा प्रवाह ही आज की फंक्शनल रिकवरी के मूल आधार हैं।
विद्यार्थियों से आह्वान: उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे उपचार से समझ और समझ से चेतना तक की यात्रा को आगे बढ़ाएं ताकि इसका लाभ पूरी मानवता को मिल सके।
विधानसभा अध्यक्ष ने स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस की शुरुआत कर भारत की स्वास्थ्य परंपरा को वैश्विक पहचान दिलाई गई है। आज दुनिया के सभी देश, चाहे वे किसी भी धर्म के अनुयायी हों, योग को अपना रहे हैं। उन्होंने गर्व के साथ कहा कि भारत का उद्देश्य कभी साम्राज्य बढ़ाना नहीं, बल्कि पूरे विश्व का मार्गदर्शक (विश्व गुरु) बनना रहा है।