इस पूरे मामले को लेकर बेनीवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने पत्र में कहा कि यह केवल उनकी व्यक्तिगत सुरक्षा का मुद्दा नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय है।
बेनीवाल ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि वर्तमान में बिना पुलिस अधीक्षक (एसपी) वाले नागौर जिले में पुलिस व्यवस्था संभाल रहे अधिकारी और रिजर्व पुलिस लाइन के जिम्मेदार कार्मिक सुनियोजित तरीके से अस्वस्थ पुलिसकर्मियों को उनकी सुरक्षा में भेज रहे हैं। उनका दावा है कि इसके पीछे एक षड्यंत्र है, ताकि यदि किसी पुलिसकर्मी की तबीयत बिगड़ती है या कोई अप्रिय घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी उन पर डालकर उनकी छवि खराब की जा सके।
सांसद ने हाल के तीन मामलों का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, 11 जुलाई को सुरक्षा ड्यूटी पर तैनात कांस्टेबल सुनील विश्नोई, जो न्यूरोलॉजी संबंधी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे, जयपुर में अचानक अस्वस्थ हो गए। बेनीवाल का कहना है कि उन्हें स्वयं देर रात कांस्टेबल को सवाई मानसिंह (एसएमएस) अस्पताल लेकर जाना पड़ा।
इसके बाद 15 जुलाई को सुरक्षा में तैनात कांस्टेबल बलबीर गुर्जर की जयपुर से लौटते समय तबीयत बिगड़ गई। उन्हें पहले नागौर और बाद में एम्स जोधपुर रेफर किया गया, जहां चिकित्सकों ने उनके हृदय संबंधी पुरानी बीमारी से पीड़ित होने की आशंका जताई।
शनिवार को भी उनकी सुरक्षा में भेजे गए तीसरे कांस्टेबल सीताराम के अस्वस्थ होने का दावा करते हुए बेनीवाल ने कहा कि वह किसी भी बीमार पुलिसकर्मी के स्वास्थ्य को जोखिम में नहीं डालना चाहते। इसी कारण उन्होंने सुरक्षा में तैनात जवान को तत्काल प्रभाव से वापस रिजर्व पुलिस लाइन भेज दिया।
बेनीवाल ने अपनी सुरक्षा में कथित कटौती का मुद्दा भी उठाया है। उन्होंने कहा कि पहले राजस्थान पुलिस की इंटेलिजेंस शाखा से मिले सुरक्षा इनपुट के आधार पर उन्हें पुलिस एस्कॉर्ट और हथियारबंद कमांडो उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन बाद में बिना किसी पूर्व सूचना या स्पष्ट कारण के अतिरिक्त सुरक्षा वापस ले ली गई।
उन्होंने सरकार से सवाल किया कि यदि पहले उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे के इनपुट थे, तो वर्तमान में उन इनपुट की स्थिति क्या है। उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार उनकी सुरक्षा का पुनर्मूल्यांकन करेगी या उनकी सुरक्षा को लेकर लापरवाही बरती जा रही है।
सांसद का दावा है कि उन्होंने पूरे घटनाक्रम की जानकारी राजस्थान पुलिस के महानिदेशक (DGP) और अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (इंटेलिजेंस) को भी फोन पर दी थी, लेकिन इसके बावजूद जिला स्तर पर कोई सुधारात्मक कार्रवाई नहीं हुई।
बेनीवाल ने आरोप लगाया कि नागौर में तैनात कुछ पुलिस अधिकारी निष्पक्ष प्रशासनिक दायित्व निभाने के बजाय राजनीतिक प्रभाव में काम कर रहे हैं और उनकी सुरक्षा के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने तथा उनकी सुरक्षा व्यवस्था की नए सिरे से समीक्षा कराने की मांग की है।