कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने दावा किया कि अगर समाजवादी पार्टी का कांग्रेस के साथ गठबंधन नहीं होता तो 2024 के लोकसभा चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन इतना बेहतर नहीं होता। उन्होंने कहा कि 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी 120 सीटों का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई थी, लेकिन गठबंधन के बाद 2024 में पार्टी को बड़ी संख्या में सीटें मिलीं।
इमरान मसूद ने समाजवादी पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा कि सपा ऐसे मुस्लिम नेताओं को पसंद नहीं करती जो अपनी बात खुलकर रखते हैं। उन्होंने कहा कि जो नेता अपनी राय रखते हैं, उनके साथ पार्टी में अलग व्यवहार किया जाता है। इमरान मसूद ने कहा कि ऐसा नेता अब कांग्रेस में है और वह अपनी बात मजबूती से रखने में विश्वास रखते हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस में उन्हें पूरा सम्मान मिला है और पार्टी नेतृत्व ने उन्हें आगे बढ़ने का मौका दिया है। इमरान मसूद ने अपने राजनीतिक सफर का जिक्र करते हुए कहा कि वह कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के समर्थन और जनता के विश्वास की वजह से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे हैं।
कांग्रेस सांसद ने कहा कि लोकसभा चुनाव के दौरान गठबंधन होने के बावजूद उन्होंने समाजवादी पार्टी के लिए कोई प्रचार नहीं किया था। उन्होंने दावा किया कि उनकी जीत कांग्रेस नेतृत्व और कार्यकर्ताओं की मेहनत के कारण हुई।
इमरान मसूद ने कहा कि चुनाव में जनता ने कांग्रेस की नीतियों और राहुल गांधी व प्रियंका गांधी के नेतृत्व पर भरोसा जताया। उन्होंने यह भी कहा कि गठबंधन अपनी जगह है, लेकिन हर नेता की अपनी राजनीतिक पहचान और जनता के बीच अपनी पकड़ होती है।
दरअसल, समाजवादी पार्टी के नेता उदयवीर सिंह ने इमरान मसूद को लेकर बयान दिया था कि वह अखिलेश यादव की तरह अपने संगठन के नेता नहीं हैं। उन्होंने कहा था कि इंडिया गठबंधन से जुड़े फैसले सपा और कांग्रेस के राष्ट्रीय नेतृत्व के स्तर पर लिए जाते हैं।
उदयवीर सिंह के इसी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए इमरान मसूद ने कहा कि गठबंधन केवल एक पार्टी की वजह से नहीं चलता, बल्कि दोनों दलों की भूमिका होती है। उन्होंने कहा कि किसी भी गठबंधन में सभी सहयोगी दलों का सम्मान जरूरी है।
इमरान मसूद ने अपने बयान में उत्तर प्रदेश के चर्चित नेताओं का जिक्र करते हुए कहा कि कई मुस्लिम नेताओं का राजनीतिक नुकसान हुआ है। उन्होंने मुख्तार अंसारी, अतीक अहमद और आजम खान का नाम लेते हुए कहा कि इन नेताओं के साथ जो हुआ, उसकी वजह अलग-अलग परिस्थितियां थीं।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज के नेताओं को लेकर राजनीतिक दलों को अपनी सोच बदलनी होगी और सभी वर्गों को साथ लेकर चलना होगा।
उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। ऐसे समय में सपा और कांग्रेस के बीच गठबंधन को लेकर नेताओं के बयान राजनीतिक चर्चाओं को हवा दे रहे हैं।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने 2024 के लोकसभा चुनाव में इंडिया गठबंधन के तहत साथ चुनाव लड़ा था। इस गठबंधन ने उत्तर प्रदेश में विपक्षी दलों के प्रदर्शन को मजबूत किया था। हालांकि, अब विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के नेताओं के बीच बयानबाजी से गठबंधन की दिशा को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उत्तर प्रदेश की राजनीति में मुस्लिम वोट बैंक और विपक्षी एकता अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में इमरान मसूद जैसे नेताओं के बयान सपा और कांग्रेस दोनों के लिए राजनीतिक संकेत माने जा रहे हैं।
फिलहाल, सपा और कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व की ओर से गठबंधन को लेकर कोई अंतिम घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दोनों दलों के नेताओं के बीच चल रही बयानबाजी ने प्रदेश की राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी है।