जयपुर: राजस्थान के सबसे बड़े सवाई मानसिंह (SMS) अस्पताल के चरक भवन में सोमवार शाम एक बड़ा हादसा हो गया। ENT (कान, नाक, गला) वार्ड में मरीज से मिलने आई एक महिला के सिर पर अचानक चलता हुआ छत का पंखा गिर गया। हादसे में महिला गंभीर रूप से घायल हो गई, जिसके सिर पर 12 से ज्यादा टांके आए हैं। घटना के बाद अस्पताल की मेंटेनेंस व्यवस्था और कर्मचारियों की संवेदनहीनता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
यह घटना सोमवार शाम करीब 6:00 बजे चरक भवन के ENT वार्ड में हुई:
अचानक हुआ हादसा: करौली निवासी संतोष के कान का ऑपरेशन हुआ था। उसकी बहन रेणु (59) निवासी करौली उसका हालचाल पूछने आई थी। रेणु वार्ड में बेड के पास टेबल पर बैठी हुई थी, तभी अचानक छत का पंखा टूटकर सीधे उनके सिर पर आ गिरा।
मचा हड़कंप: पंखा गिरते ही महिला का सिर फट गया और खून बहने लगा, जिससे वार्ड में चीख-पुकार मच गई और परिजन घबरा गए।
हादसे के बाद अस्पताल प्रशासन की लापरवाही और ढिलाई साफ देखने को मिली:
इलाज के लिए इंतजार: परिजनों का आरोप है कि घटना के बाद करीब 10-15 मिनट तक कोई सुध लेने नहीं आया। काफी देर बाद नर्सिंग कर्मचारियों ने एम्बुलेंस बुलाई।
आधे घंटे बाद ट्रॉमा शिफ्ट: लगभग 30 मिनट के लंबे इंतजार के बाद एम्बुलेंस आई और घायल महिला को ट्रॉमा सेंटर ले जाया गया, जहां उनके सिर पर 12 से ज्यादा टांके लगाए गए।
ट्रॉमा सेंटर में प्राथमिक उपचार के बाद भी पीड़ित महिला को समुचित इलाज के लिए भटकना पड़ा:
नहीं किया भर्ती: सिर में गंभीर चोट होने के बावजूद डॉक्टरों ने महिला को ट्रॉमा में भर्ती नहीं किया। डॉक्टरों ने मेडिसिन डिपार्टमेंट में भर्ती की सिफारिश की, लेकिन वहां भी भर्ती करने से इनकार कर दिया गया।
बिना डॉक्टर के बीत गई रात: आखिरकार घायल महिला को वापस चरक भवन लाकर उसकी बहन के पास वाले बेड पर शिफ्ट कर दिया गया। परिजनों को आश्वासन दिया गया कि मेडिसिन डिपार्टमेंट से डॉक्टर आकर देखेंगे, लेकिन मंगलवार सुबह 11 बजे तक भी कोई डॉक्टर जांच के लिए नहीं पहुंचा।
इस दर्दनाक हादसे ने अस्पताल के इलेक्ट्रिकल और मेंटेनेंस विभाग की पोल खोलकर रख दी है:
लापरवाही पर चुप्पी: अस्पताल में पंखों, लाइटों और अन्य उपकरणों की नियमित जांच (सेफ्टी ऑडिट) के लिए पीडब्ल्यूडी और बिजली विभाग के इंजीनियरों की पूरी टीम तैनात रहती है। इसके बावजूद ऐसा हादसा होना बड़ी लापरवाही को दर्शाता है।
अधिकारी बचते नजर आए: हादसे के बाद जब जिम्मेदार अधिकारी (जेईएन शक्ति सिंह) से बात करने की कोशिश की गई, तो वे मामले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए। समय रहते ध्यान न दिए जाने पर आगे भी ऐसे हादसों की आशंका बनी हुई है।