सवाई माधोपुर: राजस्थान के कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा सोमवार को सवाई माधोपुर जिले के दौरे पर रहे, जहां दीवाड़ा और माणोली गांवों में आयोजित पारंपरिक कार्यक्रमों में उनका अभूतपूर्व स्वागत किया गया। ग्रामीणों ने जहां उन्हें हाथी पर बैठाकर जुलूस निकाला, वहीं मंत्री ने भी आम जनता और लोक कलाकारों के साथ घुल-मिलकर लोक संस्कृति का जमकर आनंद लिया।
सोमवार को दीवाड़ा गांव में कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा का स्वागत करने के लिए ग्रामीणों ने एक विशेष और शाही योजना बनाई थी:
हाथी की सवारी: ग्रामीणों ने कन्हैया पद दंगल कार्यक्रम में शिरकत करने पहुंचे कृषि मंत्री का स्वागत किसी राजा-महाराजा की तरह किया। उन्हें सम्मानपूर्वक हाथी पर बैठाया गया।
1 किलोमीटर लंबा जुलूस: करीब एक किलोमीटर की दूरी तक डॉ. किरोड़ी लाल मीणा को हाथी पर बैठाकर पद दंगल कार्यक्रम स्थल तक लाया गया। इस दौरान रास्ते भर ग्रामीणों ने उन पर फूलों की भारी बारिश की और पूरा माहौल उत्सव जैसा नजर आया।
कन्हैया पद दंगल के मुख्य मंच पर पहुंचने के बाद कार्यक्रम का रंग और भी गाढ़ा हो गया:
शानदार प्रस्तुतियां: दंगल कार्यक्रम में जुटे नामचीन लोक गायकों ने एक से बढ़कर एक पारंपरिक भजनों और राजस्थानी लोक गीतों की प्रस्तुतियां दीं।
कलाकारों के साथ डांस: गानों की धुन और लोक वाद्ययंत्रों की थाप सुनकर कृषि मंत्री खुद को रोक नहीं पाए। वे तुरंत मंच पर पहुंचे और स्थानीय लोक कलाकारों के साथ कदम से कदम मिलाकर जमकर थिरकते और झूमते नजर आए, जिसे देख पंडाल में मौजूद भारी भीड़ ने तालियां बजाकर उनका उत्साहवर्धन किया।
दीवाड़ा के बाद कृषि मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा उसी दिन पास के ही माणोली गांव में आयोजित एक अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने पहुंचे:
बड़ी संख्या में जुटे ग्रामीण: इस कार्यक्रम में भी स्थानीय समुदाय के लोगों, प्रबुद्ध नागरिकों और लोक कलाकारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और मंत्री का गर्मजोशी से स्वागत किया।
माणोली गांव के मंच से उपस्थित जनसमुदाय और कलाकारों को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को रेखांकित किया:
डॉ. मीणा ने सभी कलाकारों की कला की सराहना करते हुए उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में जीवित यह लोक संस्कृति ही हमारी असली पहचान और गौरव है। इस धरोहर को आने वाली पीढ़ियों के लिए संरक्षित रखना और इसे लगातार प्रोत्साहित करना हम सभी की सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है।