जयपुर: राजस्थान के कृषि एवं ग्रामीण विकास मंत्री डॉ. किरोड़ी लाल मीणा गुरुवार दोपहर अचानक भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) के मुख्यालय पहुंचे। हाल ही में बीज निगम के तत्कालीन प्रबंध निदेशक (MD) जुगल किशोर मीणा की गिरफ्तारी के मामले में दर्ज हुई एफआईआर को लेकर किरोड़ी लाल मीणा खुलकर सामने आ गए हैं। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि यदि वे जांच में दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए, लेकिन यदि वे निर्दोष हैं तो एसीबी को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
डॉ. किरोड़ी लाल मीणा दोपहर सवा चार बजे सीधे एसीबी मुख्यालय पहुंचे, हालांकि उस समय ब्यूरो के महानिदेशक (DG) मुख्यालय में मौजूद नहीं थे:
जनता में भ्रम: किरोड़ी लाल ने कहा कि वे एसीबी से यह पूछने आए हैं कि 8 जून को बीज निगम मामले में दर्ज हुई एफआईआर में जिस 'डॉक्टर' और 'मंत्री' का जिक्र किया गया है, वह आखिर कौन है? चूंकि वे खुद एक डॉक्टर भी हैं और सरकार में मंत्री भी हैं, इसलिए पूरी राजस्थान की जनता के बीच एक बड़ा भ्रम बना हुआ है।
बदनामी से हूँ पीड़ित: उन्होंने कहा, "मुझ पर कांग्रेस और गोविंद सिंह डोटासरा जैसे लोग आरोप लगा रहे हैं, जिन्होंने खुद राजस्थान को लूटकर बर्बाद कर दिया। उनके इन बेबुनियाद आरोपों से मैं मानसिक रूप से बहुत पीड़ित हूँ। मैं यह साफ करने आया हूँ कि अगर वह व्यक्ति मैं हूँ, तो मुझे अभी गिरफ्तार करें।"
मंत्री किरोड़ी लाल ने मामले में त्वरित और पारदर्शी कार्रवाई की मांग करते हुए भविष्य की राजनीति पर भी बात रखी:
गिरफ्तारी का चैलेंज: किरोड़ी लाल मीणा ने सीधे चुनौती देते हुए कहा कि अगर वह डॉक्टर और मंत्री मैं ही हूँ, तो मुझे सलाखों के पीछे डाला जाए। अगर आज कार्रवाई नहीं हुई तो कुछ दिनों बाद विपक्ष यह नैरेटिव चलाएगा कि सत्ताधारी दल का नेता होने के कारण मेरे खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया।
नाम उजागर करने की मांग: उन्होंने साफ कहा कि अगर उस एफआईआर में शामिल नाम उनका नहीं है, तो एसीबी को बिना देर किए राज्य की जनता के सामने सच रखना चाहिए कि वह असली चेहरा कौन है।
एसीबी की हालिया कार्रवाई के तौर-तरीकों पर नाराजगी जाहिर करते हुए कैबिनेट मंत्री ने एजेंसी को सख्त हिदायत भी दी:
पॉलिटिकल वेपन का आरोप: किरोड़ी लाल ने आरोप लगाया, "मुझे पूरा भरोसा है कि एसीबी किसी राजनीतिक दबाव में आकर मुझे जानबूझकर बदनाम करने की कोशिश कर रही है। इस पूरी कार्रवाई में एसीबी का इस्तेमाल एक 'पॉलिटिकल वेपन' (राजनीतिक हथियार) की तरह किया गया है।"
खबरें छपवाने का दावा: उन्होंने कहा कि मामले को लेकर मीडिया में जिस तरह की खबरें प्लांट करवाई गईं, वह सब उनकी पूरी जानकारी में है और यह उन्हें राजनीतिक रूप से नुकसान पहुंचाने का एक कुत्सित प्रयास है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि एसीबी को ऐसे संवेदनशील मामलों में अपनी 'लक्ष्मण रेखा' पार करने से बचना चाहिए।