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4 महीने से लापता बच्ची को लेकर विधायक रविंद्र सिंह भाटी का धरना, बोले– 'पशु गायब होता तो पूरा प्रशासन सक्रिय हो जाता'

बाड़मेर: शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी बुधवार को गिरल गांव से रवाना होकर शिव थाने के सामने चल रहे धरने में शामिल हुए। यहाँ एक परिवार पिछले 10 दिनों से अपनी नाबालिग बच्ची को ढूंढने की मांग को लेकर धरने पर बैठा है, जो करीब चार महीने से लापता है।

 

पीड़ित परिवार से की मुलाकात और थाने का घेराव

विधायक भाटी ने धरने पर बैठे पीड़ित परिवार के सदस्यों से विस्तार से बातचीत की। इसके बाद उन्होंने समर्थकों और धरने पर बैठे लोगों के साथ मिलकर शिव थाने का घेराव किया। भाटी ने आक्रोश जताते हुए कहा कि यह दलित परिवार की बच्ची का मामला है और पुलिस पिछले चार महीने से उसे ढूंढने में नाकाम रही है।

 

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर खड़े किए सवाल

भाटी ने अपने संबोधन में प्रशासन के दोहरे मापदंडों पर तीखा प्रहार किया:

  • वीआईपी कल्चर पर तंज: भाटी ने कहा कि अगर किसी बड़े अफसर का पालतू पशु भी गायब हो जाता है, तो पूरा सरकारी अमला सड़कों पर उतर आता है, लेकिन यहाँ एक बच्ची चार महीने से गायब है और पुलिस के हाथ खाली हैं।

  • तालियां बजाने पर टोका: जब उनके संबोधन के दौरान लोगों ने तालियां बजाईं, तो विधायक ने उन्हें रोकते हुए कहा कि यह तालियां बजाने का समय नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम के लिए शर्म की बात है।

 

"यह समाज अकेला नहीं है": प्रशासन को चेतावनी

विधायक ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन को यह भ्रम नहीं पालना चाहिए कि यह समाज अकेला है।

  • हर चौखट पर गुहार: पीड़ित परिवार ने अपनी बच्ची के लिए बाड़मेर से लेकर जयपुर तक के हर दफ्तर के चक्कर लगाए हैं, लेकिन उन्हें अब तक न्याय नहीं मिला।

  • धरने की चेतावनी: भाटी ने जिम्मेदार अधिकारियों से जवाब मांगा और कहा कि जब तक परिवार को संतुष्ट नहीं किया जाता, वह खुद पीड़ित परिवार के साथ धरने पर बैठे रहेंगे।

 

शांतिपूर्ण प्रयास की सीमा समाप्त

विधायक ने कहा कि अब तक उन्होंने इस मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया था, लेकिन पुलिस की ओर से कोई ठोस सबूत या सुराग नहीं मिलने के कारण अब उन्हें उग्र प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा है।

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