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बीकानेर में कांग्रेस का बड़ा शक्ति प्रदर्शन; कलेक्ट्रेट पर भारी हंगामा, बैरिकेड्स पर चढ़े कार्यकर्ता, पुलिस ने भांजी लाठियां

बीकानेर: बीकानेर के पीबीएम (PBM) अस्पताल में प्रसूताओं की मौत और चिकित्सा व्यवस्था में फैली अव्यवस्थाओं को लेकर कांग्रेस ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट के बाहर ज़ोरदार प्रदर्शन किया। इस दौरान भारी हंगामा देखने को मिला, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हल्का बल प्रयोग करना पड़ा।

 

कलेक्ट्रेट में घुसने का प्रयास, बैरिकेड्स पर चढ़े कांग्रेसी

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई। उग्र प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर के भीतर घुसने का प्रयास किया और वहां लगाई गई सुरक्षा बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। मौके पर मुस्तैद भारी पुलिस जाब्ते ने उन्हें आगे बढ़ने से रोका। जब स्थिति बेकाबू होने लगी, तो पुलिस ने हल्का बल प्रयोग (लाठीचार्ज) कर प्रदर्शनकारियों को खदेड़ा।

 

कलेक्ट्रेट के बाहर छावनी जैसा नजारा

सुरक्षा के मद्देनजर कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर पुलिस, आरएसी (RAC) और स्पेशल पुलिस फोर्स के जवानों को तैनात किया गया था। सुरक्षा के कड़े इंतजामों के तहत बैरिकेडिंग के साथ-साथ वाटर कैनन (पानी की बौछार करने वाली गाड़ी) और आंसू गैस छोड़ने वाली मशीनें भी तैनात रखी गईं।

 

डोटासरा और जूली नहीं गए कलेक्टर से मिलने

हंगामे के बाद कलेक्टर को ज्ञापन सौंपने के लिए कांग्रेस का एक प्रतिनिधिमंडल अंदर गया। हालांकि, इस प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली खुद शामिल नहीं हुए। वार्ता के लिए गए दल में बिशनाराम सियाग, पूर्व मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला, भंवर सिंह भाटी और मदन गोपाल मेघवाल शामिल रहे।

 

मंच पर गुटबाजी: डोटासरा के इशारे के बाद भी लगे 'डूडी अमर रहें' के नारे

सभा के दौरान कांग्रेस की अंदरूनी गुटबाजी भी खुलकर सामने आ गई। जब पूर्व मंत्री गोविंदराम मेघवाल मंच से संबोधित कर रहे थे, तभी पूर्व नेता प्रतिपक्ष स्वर्गीय रामेश्वर डूडी के समर्थकों ने जमकर नारेबाजी शुरू कर दी। मंच पर मौजूद पीसीसी चीफ डोटासरा ने हाथ के इशारे से कार्यकर्ताओं को शांत और चुप रहने को कहा, लेकिन इसके बावजूद मेघवाल के पूरे संबोधन के दौरान 'डूडी अमर रहें' के नारे गूंजते रहे।

 

सरकार पर बरसे दिग्गज: शिक्षा मंत्री और यमुना समझौते पर उठाए सवाल

इस महाप्रदर्शन में कांग्रेस के आला नेताओं ने राज्य की भजनलाल सरकार को आड़े हाथों लिया:

"जहां लोग जान बचाने जाते हैं, वहां से अर्थी निकलती है" — टीकाराम जूली नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने पीबीएम अस्पताल के हालातों पर दुख जताते हुए कहा कि आज अस्पतालों से लाशें निकल रही हैं और सरकारी स्कूलों की बिल्डिंग्स गिर रही हैं। शिक्षा मंत्री मदन दिलावर के 'निकम्मेपन' वाले बयान पर पलटवार करते हुए जूली ने कहा, "शिक्षा मंत्री के खुद के पोते प्राइवेट स्कूल में पढ़ रहे हैं, तो फिर यह किसका निकम्मापन है?"

उन्होंने यमुना जल समझौते को लेकर भी सरकार को घेरा और कहा कि इस समझौते के तहत राजस्थान को सिर्फ चार महीने पानी मिलेगा, वह भी तब जब हरियाणा का कोटा पूरा हो जाएगा। इस पूरी योजना में राजस्थान के 33 हजार करोड़ रुपए लग जाएंगे।

डॉ. बी.डी. कल्ला का बड़ा आरोप: 'ब्लैकलिस्टेड कंपनियों से खरीदी दवाइयां, मॉनिटर में घोटाला'

पूर्व शिक्षा मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला ने अस्पताल प्रशासन और सरकार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए। कल्ला ने कहा:

  • पीबीएम अस्पताल में लापरवाही के कारण दो गर्भवती महिलाओं की मौत हो गई।

  • अस्पताल के लिए ब्लैकलिस्टेड (काली सूची में डाली गई) कंपनियों से दवाइयां खरीदी जा रही हैं।

  • आईसीयू (ICU) के नाम पर 17 करोड़ रुपए खर्च कर 1500 मल्टीपैरा मॉनिटर खरीदे गए। जो मॉनिटर बाजार में 77 हजार रुपए का मिलता है, उसे एक-एक लाख रुपए में खरीदा गया। इतने बड़े खर्च के बाद भी अस्पताल के हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।

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