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भूतपूर्व सैनिक विकास समिति का बड़ा मुद्दा: उत्तराखण्ड में नॉन बैटल कैजुअल्टी सैनिक परिवारों को अनुकंपा नियुक्ति की मांग....

23 मार्च2026, देहरादून (उत्तराखंड) में भूतपूर्व सैनिक विकास समिति, उत्तराखंड के प्रतिनिधिमंडल ने प्रदेश के सैनिक कल्याण मंत्री गणेश जोशी को ज्ञापन सौंपा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने मंत्री महोदय को मंत्रिमंडल मंत्री का दर्जा मिलने पर मालाएं पहनाकर उनका सम्मान किया तथा बधाई दी। मंत्री ने भी इस अवसर पर सैनिक प्रतिनिधियों का आभार व्यक्त किया। ज्ञापन में नॉन बैटल कैजुअल्टी के मामलों में सैनिकों के आश्रित परिवारों को अनुकंपा के आधार पर नौकरी प्रदान करने, भूतपूर्व सैनिकों के पुनर्वास को सुदृढ़ करने तथा आरक्षण से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने इन मांगों को सैनिक परिवारों की सामाजिक सुरक्षा और सम्मान से सीधे जुड़ा विषय बताया।

प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व राष्ट्रीय अध्यक्ष कर्नल देव आनंद लोहामरोड़ कर रहे थे। उनके साथ प्रदेश संरक्षक कर्नल शर्मा, प्रदेश अध्यक्ष कैप्टन प्रकाश चंद्र तथा देहरादून जिलाध्यक्ष कमांडो शिवजी राय सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। कर्नल लोहामरोड़ ने मंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि सैनिक का सेवाकाल स्वभावतः जोखिमपूर्ण होता है और सेवाकाल के दौरान किसी भी कारण से मृत्यु होने पर उसके परिवार पर गहरा आर्थिक और सामाजिक संकट आता है।

उन्होंने कहा कि देश में प्रचलित व्यवस्था के अनुसार किसी भी सरकारी कर्मचारी की सेवाकाल में मृत्यु होने पर उसके आश्रित को अनुकंपा नियुक्ति दी जाती है, लेकिन सैनिकों के मामले में विशेषकर नॉन बैटल कैजुअल्टी के मामलों में यह व्यवस्था स्पष्ट रूप से लागू नहीं है। इसलिए आवश्यक है कि सैनिकों के लिए भी एक समान और बाध्यकारी प्रावधान बनाया जाए, जिससे उनके आश्रित परिवारों को सुरक्षा और सम्मान मिल सके।

प्रतिनिधिमंडल ने यह भी उल्लेख किया कि राजस्थान सरकार ने दिसंबर 2022 में नॉन बैटल कैजुअल्टी सैनिकों के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति का अधिकार प्रदान करते हुए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। इसके मुकाबले उत्तराखंड में वर्तमान में भूतपूर्व सैनिकों को केवल 5 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है, जबकि राजस्थान में यह विभिन्न श्रेणियों में 11 से 14 प्रतिशत तक है।

ज्ञापन पर प्रतिक्रिया देते हुए सैनिक कल्याण मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस विषय का गंभीरता से अध्ययन किया जाएगा और सैनिकों के मान-सम्मान को ध्यान में रखते हुए नॉन बैटल कैजुअल्टी के मामलों में सैनिक आश्रित वीर माता या परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी प्रदान करने के विषय में उत्तराखंड सरकार सकारात्मक और सार्थक कदम उठाएगी।