दिल्ली: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी के 'जिम्मेदारी नई पीढ़ी के हाथों में सौंपने' वाले बयान को लेकर जारी अटकलों पर मंगलवार को उनके कार्यालय की ओर से स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। गडकरी के दफ्तर ने कहा है कि इस बयान का राजनीति या उनके रिटायरमेंट से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह बात अपने ट्रस्ट द्वारा चलाए जा रहे सामाजिक कार्यों के संदर्भ में कही थी।
गौततलब है कि कई मीडिया रिपोर्ट्स में गडकरी के बयान को राजनीति से संन्यास लेने की अटकलों से जोड़कर देखा जाने लगा था। इस पर गडकरी के दफ्तर ने स्पष्ट किया कि उन्होंने लक्ष्मणराव मानकर ट्रस्ट द्वारा संचालित सामाजिक गतिविधियों और एकल विद्यालयों की जिम्मेदारी युवाओं को सौंपने की बात कही थी, जिसे गलत संदर्भ में पेश किया गया।
23 अगस्त को नागपुर में 'एकलव्य एकल विद्यालय शिक्षक-पर्यवेक्षक प्रशिक्षण वर्ग' कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा था कि वे 30 से अधिक वर्षों से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। उन्होंने कहा, "मैं अब पहले जितना काम नहीं कर पाता। जब कर सकता था, तब किया। अब मेरा काम में दखल कम हो गया है। नई पीढ़ी आ चुकी है और वरिष्ठ लोग उन्हें मार्गदर्शन दे रहे हैं।"
कार्यक्रम के दौरान नितिन गडकरी ने अपनी सेहत और दिनचर्या पर बात करते हुए युवाओं को फिटनेस का संदेश दिया। उन्होंने कहा:
नियमित व्यायाम: "मैं रोज सुबह उठकर ढाई घंटे एक्सरसाइज और प्राणायाम करता हूं। मेरा ट्रेनर मुझसे वर्कआउट करवाता है। युवाओं को भी रोजाना कम से कम आधा घंटा व्यायाम और प्राणायाम जरूर करना चाहिए।"
अनुशासित जीवन: उन्होंने बताया कि पहले उनका जीवन काफी अनियमित था, लेकिन अब वे अनुशासित जीवनशैली अपनाते हैं।
गडकरी ने अपने शुरुआती राजनीतिक दिनों की यादें साझा करते हुए बताया कि वे और उनके साथी भावुक होकर साइकिल और स्कूटर से पार्टी के काम के लिए निकल पड़ते थे।
"उस समय हमारी पहचान के एक व्यक्ति के पास एम्बेसडर कार थी। जब भी पार्टी के बड़े नेता आते थे, तो उनके आने-जाने की सुविधा बनी रहे, इसलिए हमने उस कार मालिक को ही पार्टी अध्यक्ष बना दिया था।"
37 साल से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय और पिछले 12 सालों से मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री की भूमिका निभा रहे गडकरी के स्वास्थ्य को लेकर भी अतीत में चर्चाएं रही हैं। 7 दिसंबर 2018 को महाराष्ट्र के अहमदनगर में महात्मा फुले कृषि विद्यापीठ के दीक्षांत समारोह में राष्ट्रगान के दौरान वे लो ब्लड शुगर के कारण अचानक लड़खड़ाकर बेहोश हो गए थे। तब तत्कालीन राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने उन्हें संभाला था और डॉक्टरों की जांच के बाद वे सामान्य हो गए थे।