पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अपने ऑफिशियल सोशल मीडिया हैंडल 'एक्स' (पहले ट्विटर) पर साल 2013 की ऐतिहासिक तस्वीरें साझा की हैं। इन तस्वीरों को शेयर करते हुए गहलोत ने लिखा:
"मुख्यमंत्री को शायद यह ज्ञात ही नहीं है कि पचपदरा रिफाइनरी का वास्तविक शिलान्यास साल 2013 में ही यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी और तत्कालीन पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली द्वारा किया जा चुका था। ये तस्वीरें उसी ऐतिहासिक मौके की हैं।"
अशोक गहलोत ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा पर निशाना साधते हुए कहा कि वे पूर्व में भी रिफाइनरी में केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी को लेकर गलत बयान दे चुके हैं। गहलोत ने तीखे लहजे में कहा, "मुख्यमंत्री को यदि इतिहास की जानकारी नहीं है, तो वे सार्वजनिक रूप से गलत बयानबाजी करने के बजाय अपने अधिकारियों से सही आंकड़े और दस्तावेज मंगवाकर पढ़ लें।"
गहलोत ने भाजपा पर परियोजना को अटकाने का आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र सरकार और राज्य की तत्कालीन भाजपा सरकार ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पांच साल तक ठंडे बस्ते में डाले रखा। इसी देरी के कारण प्रोजेक्ट की लागत 37,000 करोड़ रुपए से दोगुनी बढ़कर लगभग 80,000 करोड़ रुपए तक पहुंच गई।
गहलोत के इस हमले के बाद भाजपा भी पूरी तरह हमलावर मूड में आ गई। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने भी 'एक्स' पर पलटवार करते हुए मोर्चा संभाला। राठौड़ ने पूर्व मुख्यमंत्री को आड़े हाथों लेते हुए साफ तौर पर कहा, "गहलोत साहब, पचपदरा रिफाइनरी को लेकर जनता को गुमराह करना और भ्रम फैलाना बंद करें।" भाजपा का स्पष्ट मत है कि पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने केवल चुनावी लाभ के लिए जल्दबाजी में शिलान्यास किया था, जबकि असली काम भाजपा शासन में हुआ है।
रिफाइनरी की स्थापना के बैकग्राउंड को समझाते हुए अशोक गहलोत ने बताया कि राजस्थान की मरुधरा पर रिफाइनरी लाना बेहद चुनौतीपूर्ण कार्य था। इसके लिए 'हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड' (HPCL) को राजी करना आसान नहीं था।
उन्होंने तकनीकी पहलू स्पष्ट करते हुए लिखा:
सामान्य तौर पर देश में होने वाली रिफाइनरी परियोजनाओं में राज्य सरकार की कोई हिस्सेदारी नहीं होती है।
लेकिन एचपीसीएल को सहमत करने के लिए तत्कालीन राजस्थान सरकार ने दूरदर्शिता दिखाई और रिफाइनरी में 26% की हिस्सेदारी खुद ली।
इसी दूरगामी सोच के परिणामस्वरूप 'एचपीसीएल राजस्थान रिफाइनरी लिमिटेड' (HRRL) नामक संयुक्त उद्यम (Joint Venture) का गठन हुआ, जिसने आज इस भव्य रिफाइनरी को धरातल पर उतारा है।